टीआरपी डेस्क। जब भी कोई प्रत्याशी चुनाव लड़ता है तो वह चुनाव आयोग को अपनी संपत्ति का विवरण भी देता है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के सबसे अमीर विधायक मुंबई के घाटकोपर ईस्ट विधानसभा से भाजपा के पराग शाह हैं। वहीं दूसरी ओर सबसे कम संपत्ती वाले विधायक पश्चिम बंगाल के इंदस विधानसभा से भाजपा के ही निर्मल कुमार धारा हैं।
भारत में नेताओं की संपत्ति जानने में अक्सर लोगों की दिलचस्पी रहती है। ज्यादातर लोग सांसद और विधायकों की संपत्ति जानने के लिए गूगल सर्च भी करते हैं। इंटरनेट पर इनकी संपत्ति का ब्यौरा मिल भी जाता है। दरअसल, जब भी कोई शख्स चुनाव लड़ता है, तो उसे संपत्ति का हलफनामा देना पड़ता है। इसमें उसकी लेनदारी और देनदारी समेत सारे रिकॉर्ड दर्ज होते हैं। यही हलफनामा बाद में चुनाव आयोग इंटरनेट पर भी डालता है। ताकि आम जनता को अपने नेता की सारी जानकारी मिल सके।
भाजपा के ज्यादातर विधायक सबसे धनवान
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने कुछ समय पहले एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें देश के सबसे अमीर और सबसे गरीब विधायक की संपत्ति के बारे में बताया गया है। दिलचस्प बात ये है कि सबसे अमीर विधायक भी भाजपा से हैं और सबसे गरीब विधायक भी भाजपा के ही हैं। ADR की रिपोर्ट बताती है कि प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में भाजपा विधायकों के पास सबसे अधिक संपत्ति है।
देश का सबसे अमीर विधायक कौन ?
ADR की रिपोर्ट बताती है कि मुंबई के घाटकोपर ईस्ट वीधानसभा से विधायक पराग शाह भारत के सबसे अमीर विधायक हैं। पराग शाह भाजपा के विधायक हैं। पराग शाह के पास तकरीबन 3,400 करोड़ रुपए की संपत्ति दर्ज है।

दूसरे नंबर पर कर्नाटक के कनकपुरा विधानसभा से कांग्रेस विधायक और डिप्टी CM डीके शिवकुमार हैं। उनकी संपत्ति 1,413 करोड़ रुपए की है। गौर करने वाली बात यह है कि पराग शाह और डीके शिवकुमार जो सबसे अमीर विधायकों की सूचि में पहले और दूसरे स्थान पर हैं उनके बीच भी तकरीबन 2,000 करोड़ रुपए की संपत्ती का अंतर सामने आया है।

देश का सबसे गरीब विधायक कौन ?
ADR की रिपोर्ट के मुताबिक देश में सबसे गरीब विधायक निर्मल कुमार धारा हैं। निर्मल कुमार पश्चिम बंगाल की इंदस विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक हैं। उनके द्वारा दाखिल किए गए संपत्ती विवरण में उन्होंने मात्र 1,700 रुपए की संपत्ति का ब्यौरा पेश किया था।

4,092 विधायकों पर किया रिसर्च
ADR की रिपोर्ट में चुनाव लड़ने से पहले विधायकों की ओर से दिए गए हलफनामों का विश्लेषण है। इस विश्लेषण में देश के 28 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 4,092 विधायकों की प्राप्त जानकारी के आधार पर इस सर्वे को अंजाम दिया गया।



