टीआरपी डेस्क। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। कुसमी विकासखंड के ग्राम पंचायत मड़वा स्थित प्राथमिक शाला घोड़ासोत में शिक्षकों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में स्कूल के प्रधान पाठक और शिक्षक, भारत के राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, जिले के कलेक्टर और SP तक का नाम नहीं बता पाए।

नहीं मिले सामान्य सवालों के जवाब

मीडियाकर्मियों ने जब स्कूल में पहुंचकर बच्चों से सामान्य ज्ञान के प्रश्न पूछे। तो छात्रों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री जैसे मूलभूत जानकारी के सवालों का भी उत्तर नहीं दिया। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब वही प्रश्न शिक्षकों से किए गए और वे भी जवाब देने में असमर्थ रहे।

स्पेलिंग लिखने में शिक्षक भी फेल

स्कूल में उपस्थित तीनों शिक्षक, जिनमें प्रधान पाठक भी शामिल थे, ‘Eleven’, ‘Eighteen’, ‘Nineteen’ जैसे शब्दों की सही अंग्रेजी स्पेलिंग तक नहीं लिख पाए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक खुद ही बुनियादी अंग्रेजी ज्ञान से वंचित हैं।

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क्या होती है प्रशासनिक मॉनिटरिंग ?

इस घटना ने न केवल स्कूल की शिक्षकों, बल्कि पूरे जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली प्रणाली पर बड़ा सवाल कर दिया है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी मॉनिटरिंग और निरीक्षण में गंभीर नहीं हैं, जिसके चलते बच्चों के रिज़ल्ट पर सीधा नज़र आता है।

DEO ने दिया कार्रवाई का आश्वासन

मामले के सामने आने के बाद बलरामपुर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने वीडियो की जांच करने की बात कही और मामले में दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर पहल करने का आश्वासन दिया है।

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि ग्रामीण अंचलों में शिक्षा व्यवस्था आज भी कितनी कमजोर और विभाग कितना लापरवाह है। यदि ऐसे शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं, तो आने वाली पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय होना तय है। अब देखना होगा कि यह घटना केवल आश्वासन तक सीमित रह जाती है या प्रशासन वास्तविक सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाता है।

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