रायपुर। प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना अंतर्गत निजी अस्पतालों के लंबित क्लेम दावों के भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रयासों से वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु प्रावधानित राशि में से 375 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी गई है, हालांकि इस वर्ष के जनवरी से मार्च महीने का भुगतान नहीं होने का अस्पताल संचालक विरोध कर रहे हैं।

वित्त विभाग द्वारा विमुक्ति आदेश जारी होने के साथ ही निजी अस्पतालों को उनके बकाया दावों का भुगतान होना शुरू हो गया है। इससे अस्पताल संचालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है तथा आम नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाओं के सुचारू संचालन में लाभ मिलेगा।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि शासन नागरिकों के हितों के प्रति सजग हैं और निजी अस्पतालों को राशि को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं राज्य के प्राथमिक कार्यों में से है और लोकहित में मरीजों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए , शासन स्तर से अस्पतालों को भुगतान शुरू कर दिया गया है और शीघ्र ही समस्त बकाया राशि का भुगतान भी कर दिया जाएगा।

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पिछले वित्तीय वर्ष का भुगतान भी बकाया

उधर एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ इंडिया (ए एच पी आई) छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया है कि विभिन्न जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्टेट नोडल एजेंसी ने वित्तीय वर्ष 2025 – 2026 (1 अप्रैल 2025 के बाद के) आयुष्मान योजना के लंबित भुगतान की आंशिक भुगतान की प्रक्रिया शुरू की है। लेकिन स्वास्थ विभाग को जनवरी से मार्च 25 के लंबित भुगतान, जिला और राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति द्वारा अनुशासित पिछले दो वर्षों के पुनर्जीवित केस, सभी फैसिलिटी की इलाज के पैकेज रिविजन तथा आगामी दिनों में प्रति माह निर्बाध भुगतान प्रक्रिया स्पष्ट करने की जरूरत है ताकि बार-बार आयुष्मान योजना में भुगतान के गतिरोध को रोका जा सके।

डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा है कि राज्य सरकार जनवरी से मार्च 2025 का अस्पतालों का आयुष्मान योजना का लंबित भुगतान तत्काल करे और अपनी नेक नियति का परिचय दे।

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