रायपुर। छत्तीसगढ़ में 108 संजीवनी एंबुलेंस सेवा का नया टेंडर एक बार फिर विवादों में है। इससे पूर्व भी टेंडर को निरस्त करना पड़ा था। अब जनसेवा मोर्चा संस्था का आरोप है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSC) ने टेंडर प्रक्रिया में शर्तें ही ऐसी रखीं, जिनसे कुछ खास कंपनियों को लाभ पहुंचे। अब जनसेवा मोर्चा संस्था ने मामले की शिकायत पीएमओ कार्यालय में की है।

शर्तों से उपजा विवाद

पीएमओ में लिखित शिकायत के अनुसार 2019 में जारी टेंडर में बोलीदाताओं से 2 साल का अनुभव और 100 एंबुलेंस संचालन का रिकॉर्ड मांगा गया था। लेकिन इस बार शर्तें काफी सख्त कर दी गईं। जनसेवा मोर्चा संस्था ने आरोप लगाया है कि..

  • बोली लगाने वाली कंपनी के पास कम से कम 5 साल का अनुभव और लगातार 3 साल तक 300 एंबुलेंस संचालन का रिकॉर्ड होना जरूरी किया गया।
  • न्यूनतम सालाना टर्नओवर 150 करोड़ और नेटवर्थ 75 करोड़ तय कर दी गई।
  • EMD राशि को 50 लाख से बढ़ाकर 10 करोड़ कर दिया गया।
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वहीं इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि ये शर्तें इतनी कठोर हैं कि छोटे और मंझोले संगठनों के लिए टेंडर प्रक्रिया में भाग लेना लगभग असंभव ही है।

MSME नियमों की अनदेखी

जनसेवा मोर्चा संस्था का कहना है कि भारत सरकार के नियमों के मुताबिक MSME पंजीकृत संस्थाओं को टेंडर शुल्क और EMD से छूट दी जाती है। लेकिन इस बार CGMSC ने इस प्रावधान को लागू नहीं किया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या MSME संस्थाओं को जानबूझकर बाहर किया गया।

कंसोर्टियम पर रोक

जनसेवा मोर्चा संस्था द्वारा की गई शिकायत के अनुसार 2019 के टेंडर में दो या अधिक कंपनियां मिलकर (Joint Venture/Consortium) बोली लगा सकती थीं। लेकिन इस बार इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया। इससे तकनीकी रूप से सक्षम लेकिन सीमित संसाधनों वाली कंपनियों को मौका नहीं मिला।

तकनीकी मूल्यांकन में पक्षपात?

संस्था ने तकनीकी मूल्यांकन प्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि मूल्यांकन के मापदंड इस तरह तय किए गए कि CAMP नाम की कंपनी को अधिक अंक मिलें, जबकि EMRI और JAES जैसी बड़ी और अनुभवी कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ा।

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जनसेवा मोर्चा संस्था के सदस्यों के अनुसार 12 जून 2025 को घोषित परिणामों में CAMP को 91.9 अंक मिले, जबकि EMRI को 87.59 और JAES को 80.5 अंक मिले। वहीं इस बारे में विशेषज्ञ मानते हैं कि अनुभव और प्रोजेक्ट संख्या से जुड़े क्लॉज में बड़े स्तर पर काम करने वाली कंपनियों को जानबूझकर कम अंक दिए गए।

पहले भी रद्द हो चुका है टेंडर

जनसेवा मोर्चा संस्था ने जानकारी दी कि ऐसा पहली बार नहीं है जब 108 संजीवनी टेंडर विवादों में आया हो। इससे पहले भी अनियमितताओं की शिकायतों के बाद CGMSC को निविदा रद्द करनी पड़ी थी और एक अधिकारी तक को निलंबित किया गया था।

सुलगते सवाल

  • क्या CGMSC ने टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के बजाय किसी खास संस्था को लाभ पहुंचाने के लिए नियम बदले?
  • क्यों MSME नियमों को दरकिनार किया गया?
  • जब प्री-बिड मीटिंग में कई कंपनियों ने आपत्ति दर्ज कराई थी, तो उन्हें नजरअंदाज क्यों किया गया?
  • बार-बार विवादों में फंसने वाले 108 टेंडर की जवाबदेही कौन लेगा?
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