रायपुर। छत्तीसगढ़ में अगले दो दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश होगी। मौसम विभाग ने बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव की वजह से छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में भारी और एक दो स्थानों पर भारी बारिश की आशंका जताई गई है। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ बिजली भी गिर सकती है।
ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों में कांकेर, राजनांदगांव, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी शामिल हैं, यहां पर भारी बारिश हो सकती है। जबकि, बालोद, नारायणपुर, बीजापुर, बालोद, कबीरधाम में येलो अलर्ट जारी है। जबकि , अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होगी।
लुत्तीसढ़सा में पुराना बांध ढहा
बलरामपुर जिले में लगातार बारिश हो रही है। जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो चुका है। मंगलवार की रात करीब 11 बजे लुत्तीसढ़सा स्थित पुराना बांध पानी के तेज बहाव में बह गया। बांध के बहने से निचले इलाके के 4 घर समेत 8 लोग बह गए। इनमें से दो के शव को बरामद कर लिया गया है। जबकि बाढ़ में बहे अन्य लोगों की तलाश जारी है। कई घंटे बीत जाने के बाद भी उनका कोई अता पता नहीं है। जानकारी मिलते ही रेस्क्यू टीम और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद है।
जानिए क्या है मानसून द्रोणिका और लो प्रेशर एरिया
मानसून द्रोणिक-यह एक लंबे, निम्न दबाव वाले क्षेत्र का वर्णन करता है जो उत्तर भारत के कुछ हिस्सों से होकर गुजरता है और बंगाल की खाड़ी तक फैला होता है. यह निम्न दाब क्षेत्र, जब सक्रिय होता है, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाओं को खींचता है. इस प्रकार, यह भारत के अंदरूनी हिस्सों तक नमी ले जाती है, जिससे मजबूत मानसून की स्थिति पैदा होती है.
लो प्रेशर एरिया –जब कोई क्षेत्र आसपास के क्षेत्रों की तुलना में कम वायुमंडलीय दबाव का अनुभव करता है, तो उसे लो प्रेशर एरिया कहा जाता है. उच्च दबाव वाले क्षेत्रों से हवाएं कम दबाव वाले क्षेत्रों की ओर बहती हैं, और हवा के इस प्रवाह से तूफान और बारिश होती है. सौर विकिरण के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में निम्न दाब का क्षेत्र बनता है. जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, यह निम्न दाब पूर्व की ओर बढ़ता है.



