सारंगढ़। सारंगढ़-बिलाईगढ़ में प्रस्तावित चूना पत्थर खदान को लेकर आज होने वाली लोक सुनवाई स्थगित कर दी गई है। एक दिन पहले ही प्रभावित इलाकों के ग्रामीणों ने इस खदान का बड़े पैमाने पर विरोध किया था।
कलेक्टर ने जारी किया है ये आदेश
इस लोक सुनवाई को स्थगित करने को लेकर जारी कलेक्टर के आदेश में उल्लेख है कि मेसर्स ग्रीन सस्टेनेबल मैनुफैक्चरिंग प्रा० लि० ग्राम लालाधुरवा,
जोगनीपाली, कपिस्दा सरसरा एवं धौराभाठा, तहसील सारंगढ़ जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में प्रस्तावित चूनापत्थर (मुख्य खनिज) क्षमता 3654413.97 टन प्रतिवर्ष रकबा 200.902 हे0 के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु लोक सुनवाई हुई स्थगित कर दिया गया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार अपरिहार्य कारण से 24 सितंबर को होने वाली जनसुनवाई को स्थगित किया गया है।
मेसर्स ग्रीन सस्टेनेबल् मैनुफैक्चरिंग प्रा० लि० को जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ स्थित लालाधुरवा जोगनीपाली चूनापत्थर ब्लॉक कुल क्षेत्रफल 200.902 हेक्ट० क्षेत्र में प्रस्तावित चूनापत्थर (मुख्य खनिज) क्षमता 3654413.97 टन प्रतिवर्ष के पर्यावरणीय स्वीकृति लोक सुनवाई हेतु आवेदन किया गया है। उक्त लोक सनुवाई दिनांक 24.09.202 दिन बुधवार समय प्रातः 10.00 बजे स्थान मुडिभाटा स्थित गौठान कपिस्दा (ब) में नियत की गई है. उक्त लोक सुनवाई अपरिहार्य कारणों से स्थगित की गई है।

ग्रामीणों के विरोध के चलते सुनवाई हुई स्थगित..?
दरअसल चूना पत्थर खदान के लिए जन सुनवाई को लेकर एक तरफ जिला प्रशासन जुटा रहा तो वहीं दूसरी ओर स्थानीय जन खदान खुलने का पुरजोर तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस विशाल खदान के आरंभ होने कई तरह की परेशानियों में घिर जायेंगे और दूसरी ओर पर्यावरण पर व्यापक पैमाने पर विपरीत असर पड़ेगा।
500 एकड़ में चूना पत्थर खदान खुलने को लेकर जनसुनवाई हेतु विधिवत प्रकाशन हुआ, तब ग्रामीणों में आक्रोश तेजी से पनप गया। प्रभावित इलाकों के ग्रामीण इसके खिलाफ खुलकर सामने आ गए। प्रभावितों के साथ स्थानीय विधायक उत्तरी जांगड़े समेत स्थानीय जनप्रतिनिधिगण भी खुलकर मुखालफत में उतर गए।

कलेक्ट्रेट परिसर में दिया धरना
एक दिन पूर्व ही सारँगढ़ विकासखंड़ के लालाधुरवा, जोगनीपाली, धौराभांठा, कपिस्दा “ब”, सरसरा के सैकड़ो ग्रामीणों के साथ सारँगढ़ विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े और सारँगढ़ जनपद अध्यक्ष ममता राजीव सिंह सहित जनपद सदस्य एवम युवा कांग्रेस संयुक्त रूप से सारँगढ़ नगर में रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान आक्रोशित ग्रामीण कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों का साफ कहना है कि वे लाईम स्टोन हेतु अपना भूमि नहीं देना चाहते हैं और न ही किसी प्रकार से कोई उद्योग चाहते हैं।
हाई कोर्ट में सुनवाई है लंबित
चूना पत्थर खदान को लेकर प्रस्तावित लोक सुनवाई के विरोध में उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ बिलासपुर में एक याचिका प्रस्तुत की गई है जिसका केस नंबर WPC 25753/2025 व प्रस्तुति दिनांक 18/09/2025 है, जिसकी सुनवाई होना वर्तमान में लंबित है, याचिका कर्ताओं का कहना है कि याचिका के लंबनकाल में भी जनसुनवाई किया जा रहा है, जो कि न्याय सिद्धांत के विपरीत है।
वहीं ग्रामीणो ने बताया कि प्रभावित ग्राम अंतर्गत आने वाले ग्राम धौराभांठा स्थित अधिग्रहित भूमियों के संबंध में प्रकरण माननीय न्यायालय व्यवहार न्यायाधीश सारंगढ़ के समक्ष सिविल वाद क्रमांक ए/49/2023 के रूप में लंबित है तथा वाद भूमि के संबंध में न्यायालय द्वारा रोक लगाया गया है, जिसका भी सर्वे कंपनी के द्वारा किया गया है। फिर भी लाईम स्टोन खदान के स्थापना हेतु पर्यावरण विभाग द्वारा कंपनी का पक्ष लेकर व कंपनी के दबाव प्रभाव में आकर गलत सर्वे किया गया है।
सर्वे रिपोर्ट में अधिग्रहित भूभाग में लगे हरे-भरे खड़े वृक्षों की वास्तविक संख्या का जिक्र नहीं किया गया है और प्रभावित क्षेत्र में आने वाले स्कूल, मुक्तिधाम व अन्य निस्तारी व्यवस्था का उल्लेख नहीं किया गया है।
बहरहाल 500 एकड़ भूभाग में प्रस्तावित चूना पत्थर खदान को लेकर आयोजित लोक सुनवाई के स्थगित होने से ग्रामीणों को थोड़ी राहत तो मिली है मगर आगे प्रशासन क्या कदम उठाता है इसे लेकर ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है।



