रायपुर। प्रदेश भर में आवारा मवेशी लोगों के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। हाई कोर्ट ने जब से इस समस्या को संज्ञान में लिया है तब से सड़कों से मवेशियों को हटाने को लेकर कई अभियान चलाये गए मगर सालों बाद भी इसका निराकरण नहीं हो सका है और आये दिन इससे होने वाले हादसों में मवेशी और आम लोग भी मारे जा रहे हैं। इसे देखते हुए अब हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है, जिसके चलते जिलों से लेकर राज्य स्तर पर एक बार फिर प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

इसी कड़ी में मुख्य सचिव विकासशील ने राज्य के संभाग आयुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षकों तथा संबंधित विभागों की अधिकारियों की वर्चुअल बैठक लेकर सड़को में विचरण करने वाले घुमन्तु मवेशियों पर नियंत्रण हेतु किए जा रहे उपायों की विस्तृत समीक्षा की।

बैठक में मुख्य सचिव ने सड़कों पर विचरण करने वाले घुमन्तु गौवंशीय पशुओं पर नियंत्रण हेतु किए जा रहे उपायों की जिलेवार समीक्षा की। उन्होंने सभी जिला कलेक्टरों एवं संबंधित विभाग के अधिकारियों को अपने-अपने जिलों के नगरीय निकायों में स्थापित किए गए कांजी हाउस को तत्काल क्रियाशील करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने इन सभी कांजी हाउसों में सभी जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

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इसके अलावा उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में निर्मित गौठानों का भी उपयोग सड़कों पर विचरण करने वाले घुमन्तु गौवंशीय पशुओं को रखने के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

नई व्यवस्था को लेकर कलेक्टर ने दी जानकारी

आवारा और घूमने वाले पशुओं से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नई प्रक्रिया लागू की गई है। रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने इस सिलसिले में बैठक ली।
डॉ. सिंह ने सभी संबंधित विभागों नगर निगम, पुलिस, पंचायत और ग्रामीण विकास, पशुपालन, कृषि, लोक निर्माण, एनएचएआई और राजस्व विभाग को मिलकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

टोल ठेकेदारों और NHAI को निर्देश

सडक़ बनाने और रखरखाव से जुड़े सभी विभागों, खासकर टोल ठेकेदारों और एनएचएआई को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सडक़ों पर पशु न घूमें, इसके लिए आवश्यक फेंसिंग, गेट और सुरक्षा प्रबंध किए जाएं।

एसओपी के अनुसार, हर ग्राम पंचायत और नगर निकाय स्तर पर एक निगरानी दल बनाया जाएगा। ये दल सडक़ पर घूमने वाले पशुओं को पकडक़र उन्हें गोठान या पंजीकृत आश्रय स्थलों में रखेंगे। कलेक्टर की अध्यक्षता में एक समिति इस काम की साप्ताहिक समीक्षा करेगी और निगरानी दलों को तीन दिनों के भीतर बनाकर काम शुरू करने को कहा गया है।

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इन नंबरों पर करें कॉल

कलेक्टर ने बताया कि आवारा पशुओं से जुड़ी शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए दो टोल फ्री नंबर जारी किए गए हैं — 1033 (राष्ट्रीय राजमार्ग) 1100 (शहरी क्षेत्र) कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का अभियान है। प्रशासन का उद्देश्य है कि आवारा पशुओं को सुरक्षित ठिकाना मिले और लोगों को सुरक्षित सडक़ें मिलें। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से इस अभियान में भाग लेने की अपील की।

महीने भर तक विशेष अभियान

एक महीने तक दिन और रात दोनों समय विशेष अभियान चलाया जाएगा। सभी विभागों को मिलकर काम करने और रोजाना प्रगति रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय में देने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्राम पंचायत और नगर निकाय स्तर पर बने निगरानी दलों में लोक निर्माण, पुलिस, पशुपालन, पंचायत, कृषि, राजस्व विभाग के अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल रहेंगे। ये दल नियमित रूप से निरीक्षण कर अपने क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार करेंगे।

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