रायपुर। छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ के बैनर तले बुधवार को नि: शक्तों ने रायपुर की सड़कों पर प्रदर्शन किया और घडी चौक पर धरने पर बैठ गए। इससे परेशान पुलिस उन्हें हटाने की आधी रात तक कोशिश करती रही। बात नहीं बनी तो आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोगों को कार्रवाई का डर दिखाकर पुलिस की बस से ही इन सभी को अभनपुर में बनाये गए अस्थाई धरना स्थल रवाना कर दिया गया।

तूता का धरना स्थल राज्योत्सव तक बंद

दरअसल नवा रायपुर में राज्योत्सव के आयोजन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे की वजह से शहर से करीब 20 किमी दूर तूता माना के धरना स्थल को संधारण का हवाला देते हुए अनिश्चित काल के लिए बंद कर अभनपुर में अस्थाई धरना स्थल बनाया गया है। इधर अपनी मांगों को लेकर दिव्यांग संघ ने पहले ही ऐलान कर दिया था कि वे 29 अक्टूबर से अनिश्चित कालीन धरने पर बैठेंगे, मगर रायपुर कलेक्टर ने तूता माना में किसी भी तरह के धरना, प्रदर्शन, रैली पर रोक लगा दी है। इस वजह से आंदोलनकारी राजधानी का हृदय कहे जाने वाले घड़ी चौक पर ही धरने पर बैठ गए। वे मांगे पूरी नहीं होने तक सड़कों से हटने से मना करते रहे। रात करीब साढ़े 12 बजे घड़ी चौक में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में आंदोलनकारियों को रात साढ़े 12 बजे हटाया गया।

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6 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन

दिव्यांग संघ ने अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर अंतिम लड़ाई का ऐलान करने के साथ ही बुधवार से आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन के तहत बुधवार की सुबह से घड़ी चौक में वे धरने पर बैठ गए। एक-एक करके प्रदेशभर से आए नि:शक्त वहां इकट्‌ठे हो गए। इसके बाद सरकार को वादाखिलाफी के नाम पर जमकर घेरा।

दरअसल प्रशासनिक अमला बुधवार की शाम से उन्हें यहां से हटाने की कोशिशों में लगा रहा, लेकिन कामयाब नहीं हो सका। आखिर में रात करीब साढ़े 12 बजे पुलिस ने बस बुलवाई और कार्रवाई का डर दिखाकर सभी आंदोलनकारियों को अभनपुर के पास बनाए गए अस्थाई धरना स्थल पर ले जाया गया।

संघ की ये हैं मांगें

दिव्यांग सेवा संघ द्वारा फर्जी दिव्यांग कर्मचारियों की बर्खास्तगी, 5000 रुपए मासिक पेंशन पर BPL शर्त हटाना, अविवाहित दिव्यांग महिलाओं के लिए विवाह सहायता, आवास प्राथमिकता, अलग आरक्षण कोटा और मुफ्त यात्रा सुविधा की मांग की है। संघ ने अपनी मांगे पूरी नहीं होने की वजह से राज्योत्सव के बहिष्कार की भी घोषणा की है।

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