राजपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है। यहां कई ग्रामों की शासकीय एवं निजी भूमि को अवैध तरीके से एक ही परिवार के नाम कर दिए जाने का गंभीर आरोप लगा है। इस संबंध कई पंचायत के ग्रामीणों ने कलेक्टर बलरामपुर को लिखित शिकायत देकर तत्काल जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
क्या है शिकायत..?
ग्रामीणों ने शिकायत की है कि ग्राम पंचायत कोदौरा, कोटडीह, भेण्डरी, परसवार खुर्द, करगडीहा और पकराडी में स्थित कुल लगभग 60 से 70 एकड़ भूमि (शासकीय एवं भू-स्वामियों की निजी भूमि) को कथित रूप से तहसीलदार राजपुर और संबंधित पटवारी की मिलीभगत से एक ही परिवार के सात लोगों के नाम पर नामांतरण की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि पूरा नामांतरण ऑनलाइन दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर किया गया है। महज कुछ समय के भीतर बड़ी मात्रा में भूमि गुप्ता परिवार के नाम चढ़ा दी गई।
एक ही परिवार के नाम कैसे दर्ज हुई जमीन
आरोपों के अनुसार जिन लोगों के नाम पर यह बड़ी मात्रा में भूमि दर्ज की गई है, वे हैं-
विरेन्द्र गुप्ता
नरेन्द्र गुप्ता
धर्मेन्द्र गुप्ता
प्रिता विजय गुप्ता
प्रियंका गुप्ता
सरिता देवी
बिंद्रा देवी
ग्रामीणों का कहना है कि यह परिवार ग्राम कोदौरा में रहते हुए अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ, इसके बावजूद रिकॉर्ड में कई गांवों की जमीन एक साथ इनके नाम चढ़ा दी गई।
गड़बड़ी का इस तरह हुआ खुलासा
ग्रामीणों ने बताया कि धान खरीदी पंजीयन के लिए उन्होंने ऑनलाइन खसरा/बी-1 निकाला, तो वास्तविक भूमि स्वामियों के नाम की जगह गुप्ता परिवार के नाम दर्ज मिले। इस गंभीर विसंगति की सूचना एक सप्ताह पूर्व पटवारी एवं तहसीलदार को दी गई थी, लेकिन कोई भी कार्रवाई नहीं हुई।
गुस्साए ग्रामीण पहुंचे डीएम के पास
इसके बाद ग्रामीणों का धैर्य टूट गया और वे सामूहिक रूप से कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने विस्तृत जानकारी के साथ लिखित शिकायत सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

इतना बड़ा घोटाला बिना मिलीभगत के संभव नहीं
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शासकीय भूमि, किसानों की निजी खेती-बाड़ी, कई गांवों की पट्टे वाली जमीन सब कुछ बिना अनुमति और जांच के एक परिवार के नाम दर्ज कर दिया गया।
इनका कहना है कि इतनी भारी मात्रा में भूमि का हस्तांतरण राजस्व विभाग के लॉगिन आईडी और पासवर्ड के बिना संभव ही नहीं, इसलिए इसमें विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत साफ दिखाई देती है।
कुछ किसानों ने यह भी कहा कि कई गांवों में लगभग पूरे गांव की जमीन एक ही परिवार के नाम ऑनलाइन दिख रही है, जो रिकॉर्ड प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है।

पहले भी हुआ था ऐसा बड़ा घोटाला
ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले रामचंद्रपुर तहसील में भी इसी तरह का मामला सामने आया था। उस प्रकरण में बिचौलियों ने वनभूमि तक अपने नाम पर करा ली थी और धान बेचने की तैयारी में थे। उस समय तत्कालीन कलेक्टर ने कड़ी कार्रवाई करते हुए संबंधित तहसीलदार को निलंबित किया था और करोड़ों रुपए की हेराफेरी उजागर हुई थी।
ग्रामीणों ने कलेक्टर से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई औरआरोपी परिवार के विरुद्ध तत्काल अपराध पंजीबद्ध करने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
धान बेचने के लिए तो नहीं किया घोटाला..?
गुप्ता परिवार ने कई हेक्टेयर जमीन आखिर अपने नाम पर क्यों दर्ज कराई ? इस सवाल पर जानकारों का कहना है कि जिस किसान की जितनी खेतिहर जमीन किसान के नाम पर होती है सरकार उतना ही धान समर्थन मूल्य पर खरीदती है। गुप्ता परिवार व्यवसायी है और साजिश के तहत इस परिवार ने अवैध धान खपाने के लिए जमीनों को दस्तावेजों में अवैध ढंग से अपने नाम पर दर्ज करवा लिया। अब उम्मीद की जा रही है और वे अपने इरादे में सफल नहीं हो सकेंगे।

प्रभावित किसानों की नजर अब जिला प्रशासन पर है। अब देखना है कि इस फर्जीवाड़े में भूमिका निभाने वाले राजस्व अमले के अफसर और कर्मचारियों के नाम उजागर होते हैं या नहीं और इनके खिलाफ क्या कार्यवाही होती है?



