टीआरपी। Many symbols from the British era were changed : 15 अगस्त 1947 को हमारे देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति मिली और देश आजाद हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे देश में काफी कुछ बदलाव हुआ। आजादी मिलने के ढाई वर्ष बाद जब 26 जनवरी 1950 को भारत देश में नया संविधान बना, तब अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे अनेक प्रतीक चिन्हों को बदल दिया गया। ऐसे प्रतीक चिन्हों में रुपये, सिक्के, मुहर, ध्वज, राष्ट्रीय चिन्ह, राष्ट्र गान, राष्ट्र गीत जैसे अनेक चिन्ह आज हमारे देश की आन, बान, शान बन गए हैं। आइये जानते हैं, वे कौन-कौन से प्रतीक हैं, जो देश की आजादी और संविधान लागू होने के बाद पूरी तरह से हटाकर नए प्रतीक चिन्ह के रूप में अपनाए गए।

सरकारी कार्यालयों और अदालतों के कागजों में अंग्रेजों की मुहर यानी ठप्पा लगता था। इस मुहर को हटा दिया गया और सरकारी वर्दी से ब्रिटिश क्राउन हटाया गया। सेना में रॉयल जैसे शब्द भी हटा दिए गए। रुपये से महारानी की फोटो हटा दी गई। जरूरी कागजातों और रुपये पर अशोक चिन्ह को उपयोग में लाया जाने लगा। अंग्रेजों का झंडा यूनियन जैक की जगह तिरंगा लहराने लगा। लेटरहेड पर बाय आर्डर ऑफ हीज मैजेस्टी द किंग जैसे शब्द हटाकर गवरमेंट ऑफ इंडिया, सत्यमेव जयते जैसे शब्द प्रचलन में आए। गॉड सेव द किंग गीत को हटाकर राष्ट्रगान के रूप में ‘जन गण मन’ और राष्ट्रगीत के रूप में ‘वंदे मातरम’ को अपनाया गया। आजादी के बाद यह सब बदलाव करने में ढाई वर्ष का समय लग गया।

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इतिहास की पुस्तकों में उल्लेखित है कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने कहा था कि यदि हम आजादी से पहले के प्रतीकों के साथ देश चलाएंगे तो जनता के मन से अंग्रेजों की गुलामी का दंश मिट नहीं पाएगा। इसके पश्चात सभी प्रतीक चिन्हों को बदलने पर विचार किया गया। कुछ नेता रॉयल क्राउन बैज की जगह धार्मिक प्रतीक जैसे- धर्मचक्र, गाय, देवी-देवता की तस्वीर और ओम (ॐ) को प्रतीक रूप में घोषित करना चाहते थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल और डॉ. भीम राव अंबेडकर जैसे नेताओं का कहना था कि राष्ट्रीय प्रतीक ऐसा होना चाहिए, जिससे देश की सभ्यता, संस्कृति झलके। इसके बाद
अशोक स्तंभ, सांची के स्तूप और ताजमहल को राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह बनाने पर चर्चाएं हुई। धान, गेहूं की बालियों, हल के साथ बैलों की जोड़ी, हाथी, शेर और वट वृक्ष पर भी चर्चा की गई।

अशोक स्तंभ पर बनीं सहमति

चूंकि, अशोक स्तंभ को प्राचीन सभ्यता, नैतिक शासन और कानून का प्रतीक माना जाता था। इसलिए सभी नेताओं की सहमति पर अशोक स्तंभ को राष्ट्रीय चिन्ह घोषित करने पर सभी सर्वसम्मत हुए। प्रख्यात चित्रकार व शांति निकेतन के कला शिक्षक नंदलाल बोस और उनकी टीम ने राष्ट्रीय प्रतीक की डिजाइन बनाई। 1949 में अशोक स्तंभ की डिजाइन को अंतिम रूप दिया गया। आज यही देश की मुद्रा और सरकारी दस्तावेजों सहित अनेक महत्वपूर्ण कागजातों पर अंकित है।

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अशोक स्तंभ में है चार शेर के मुख

अशोक स्तंभ के चारों दिशाओं में चार शेर के मुख बने हैं। उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम की ओर शेर के मुख हैं। सामने से देखने पर केवल तीन मुख ही दिखाई देते हैं। नीचे पट्टी पर हाथी, दौड़ता घोड़ा, बैल, शेर और धर्मचक्र बना है। इसके नीचे सत्यमेव जयते लिख है। इसका अर्थ है कि सत्य की ही विजय होती है।

सम्राट अशोक ने बनवाया था स्तंभ

जिस अशोक स्तंभ को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में 26 जनवरी, 1950 को स्वीकृत किया गया। उस स्तंभ को सम्राट अशोक ने 280 ईसा पूर्व बनवाया था। समय के साथ यह स्तंभ भूमि पर दब गया था। जर्मनी के सिविल इंजीनियर फ्रेडरिक ओर्टेल ने चीनी यात्रियों जैसे- ह्वेनसांग और फाहियान की पुस्तकें पढ़ीं, जिसमें सारनाथ का उल्लेख था। फ्रेडरिक ओर्टेल ने 1904-1905 में खुदाई करवाई। खुदवाई में अशोक स्तंभ का ऊपरी हिस्सा यानी शेर वाला हिस्सा मिला। यह करीब 7 फीट ऊंचा था। जबकि पूरा स्तंभ 40-50 फीट ऊंचा था। खुदाई में स्तंभ टुकड़ों में मिला। यह स्तंभ वाराणसी में सारनाथ संग्रहालय में रखा हुआ है।

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अन्य महत्वपूर्ण बदलाव

पुराना नाम – नया नाम

रॉयल इंडियन आर्मी – इंडियन आर्मी
रॉयल इंडियन नेवी – इंडियन नेवी
रॉयल इंडियन एयर फोर्स – इंडियन एयरफोर्स
इंपीरियल पुलिस – इंडियन पुलिस सर्विस
इंपीरियल सिविल सर्विस – इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस

सीआरपी की जगह हुआ सीआपीएफ

अंग्रेजी शासनकाल में कानून व्यवस्था बनाए रखने और विद्रोह को कुचलने के लिए 27 जुलाई 1939 को क्राउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस (सीआरपी) गठित किया गया था। देश को स्तंत्रतता मिलने के बाद 28 दिसंबर को इसका नाम बदलकर सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) कर दिया गया। 26 जनवरी 1950 को सीआरपीएफ का बैज भी बदल दिया गया।

महत्वपूर्ण प्रतीक

राष्ट्रीय ध्वज

पहले – यूनियन जैक

बाद में – तिरंगा


राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत

पहले – गॉड सेव द क्वीन किंग

बाद में – राष्ट्र गान – जन गण मन अधिनायक जय हे और राष्ट्र गीत – वंदे मात्रम


मुद्रा यानी रुपये, सिक्के

पहले – किंग जॉर्ज की फोटो अथवा किंग इंम्परर लिखा होता

बाद में – अशोक स्तंभ और गवरमेंट ऑफ इंडिया लिखा गया