हाईकोर्ट भवन के सामने न्याय का हथौड़ा और सरकारी भर्ती परीक्षा रद्द होने की खबर का दृश्यांकन
हाईकोर्ट ने सहायक मत्स्य अधिकारी भर्ती परीक्षा 2025 के परिणाम निरस्त कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर जिले में स्थित गोबरा-नवापारा तहसील के सोनसिली गांव की सामूहिक खेती सहकारी समिति की भूमि से जुड़े मामले में गांव के सरपंच और संबंधित तहसीलदार के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की है। कोर्ट ने आदेशों की अवहेलना और यथास्थिति (स्टेटस-क्वो) तोड़ने के आरोपों को गंभीर मानते हुए दोनों को अवमानना नोटिस जारी किया है।

ये है मामला…

यह प्रकरण सोनसिली सामूहिक खेती सहकारी समिति से संबंधित है, जिसका पंजीयन वर्ष 1972-73 में सहकारी समितियां अधिनियम, 1960 की धारा 7 और 9 के तहत किया गया था। समिति की भूमि (खसरा नंबर 443/1 और 528/1, वर्तमान में 1018, 1136, 1137, 1150 और 352) राजस्व अभिलेखों में दर्ज है और इस पर समिति के सदस्य लंबे समय से शांतिपूर्वक खेती करते आ रहे हैं।

वर्ष 1995 में समिति के परिसमापन के आदेश के बाद सदस्यों ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका क्रमांक 3035/1995 दायर की थी। इस पर अदालत ने 14 सितंबर 1995 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद भूमि के अंतिम निराकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

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मध्यप्रदेश शासन ने 29 जुलाई 1997 को परिपत्र जारी कर यह स्पष्ट किया था कि परिसमापन के बाद भी पात्र सदस्यों को भूमि आवंटन तथा व्यवस्थापन की कार्रवाई की जाए। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद रायपुर कलेक्टर ने 17 सितंबर 2010 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को एक माह में कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

वर्ष 2024-25 में सोनसिली के सरपंच अजय साहू द्वारा समिति सदस्यों को भूमि से हटाने के प्रयास शुरू किए गए। इसके विरोध में सदस्यों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दो रिट याचिकाएं दाखिल कीं। 10 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए राज्य सरकार और कलेक्टर को पूर्व आदेशों के पालन के निर्देश दिए।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद 14 दिसंबर 2025 को सरपंच अजय साहू द्वारा सदस्यों के साथ मारपीट की गई। इसके बाद 1 जनवरी 2026 को खेतों में आग लगाई गई, 6 जनवरी को फसलों में मवेशी छोड़े गए और 9 जनवरी 2026 को फिर से हमला हुआ। इन घटनाओं की शिकायत पुलिस, तहसीलदार और पुलिस अधीक्षक से कई बार की गई, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

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प्रशासनिक निष्क्रियता से क्षुब्ध होकर समिति सदस्यों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की। प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सोनसिली के सरपंच अजय साहू और तहसीलदार विक्रम सिंह राठौर को अवमानना नोटिस जारी किया है।