President Droupadi Murmu at Bastar Pandum Exhibition.

टीआरपी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज बस्तर प्रवास के दौरान ‘बस्तर पंडुम’ के शुभारंभ अवसर पर जनजातीय परंपराओं और कलाकृतियों पर आधारित एक भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने बस्तर की आदिम संस्कृति को करीब से देखते हुए यहाँ के ढोकरा हस्तशिल्प, लौह शिल्प और स्थानीय व्यंजनों की जमकर सराहना की और इसे विश्व विरासत को संजोने का सशक्त माध्यम बताया।

देश की प्रथम नागरिक द्वारा बस्तर की स्थानीय कला और ‘चापड़ा चटनी’ जैसे पारंपरिक व्यंजनों की सराहना से स्थानीय कारीगरों और महिला स्व-सहायता समूहों को वैश्विक पहचान मिलेगी। यह आयोजन बस्तर के पर्यटन और हस्तशिल्प बाजार के लिए नए द्वार खोलने वाला साबित होगा।

बस्तर की विश्वप्रसिद्ध कलाओं का प्रदर्शन

प्रदर्शनी के दौरान राष्ट्रपति ने ढोकरा कला (लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक) के स्टॉल पर काफी समय बिताया। उन्होंने जाना कि कैसे समाड़ी मिट्टी, मोम और पीतल के मिश्रण से अद्भुत आकृतियां उकेरी जाती हैं। इसके अलावा, उन्होंने सागौन और साल की लकड़ी पर की गई वुड कार्विंग, टेराकोटा और सीसल कला का भी बारीकी से निरीक्षण किया।

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जनजातीय वेशभूषा और आभूषणों ने खींचा ध्यान

प्रदर्शनी में बस्तर की प्रमुख जनजातियों— दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा— की पारंपरिक वेशभूषा और चांदी, मोती व शंख से बने आभूषणों को सजीव रूप में प्रदर्शित किया गया। राष्ट्रपति ने तुम्बा कला (सूखी लौकी से निर्मित बर्तन व वाद्य यंत्र) और गढ़ा हुआ लोहे की कला (Wrought Iron Art) को भी बड़े चाव से देखा।

स्थानीय व्यंजनों का स्वाद और संस्कृति

प्रदर्शनी में बस्तर के खान-पान का भी विशेष स्टॉल लगाया गया था। यहाँ मंड़िया पेज, आमट, चापड़ा चटनी (लाल चींटी की चटनी), तीखुर और पारंपरिक पेय लांदा व सल्फी के बारे में राष्ट्रपति को जानकारी दी गई। उन्होंने बस्तर के लोक चित्रों और साहित्य के माध्यम से यहाँ के इतिहास को समझने में गहरी रुचि दिखाई।

  • प्रमुख कलाएं: ढोकरा शिल्प, टेराकोटा, वुड कार्विंग, लौह शिल्प और तुम्बा कला।
  • जनजातियां: दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा और हल्बा की संस्कृति प्रदर्शित।
  • विशेष व्यंजन: चापड़ा चटनी, मंड़िया पेज और जोंधरी लाई के लड्डू।
  • तकनीक: ढोकरा शिल्प में ‘लॉस्ट वैक्स कास्टिंग’ का उपयोग।
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राष्ट्रपति के इस दौरे के बाद बस्तर के हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़े बाजारों से जोड़ने की योजना पर काम तेज होगा। वन विभाग और हस्तशिल्प बोर्ड इन कारीगरों के उत्पादों की ब्रांडिंग और ऑनलाइन मार्केटिंग को बढ़ावा देंगे।