रायपुर। छत्तीसगढ़ की बदहाल होती जा रही शिक्षण व्यवस्था के बीच एक बार फिर दूसरे कार्यों में लगाए गए शिक्षकों को वापस मूल संस्था में लौटाने का आदेश जारी किया गया है। अब तक इस तरह के दर्जनों आदेश दिए जा चुके हैं, मगर मामूली परिवर्तन के अलावा अब तक कुछ भी संभव नहीं हो सका है।
शिक्षा विभाग में शैक्षणिक कार्यों पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने गैर शिक्षकीय कार्यों में संलग्न शिक्षकों और कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त कर मूल संस्था में उपस्थिति देने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में डीपीआई ने सभी संयुक्त संचालकों, शिक्षा संभाग तथा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट आदेश भेजा है। जारी निर्देश में कहा गया है कि शिक्षा विभाग में कार्यरत कई शिक्षक एवं कर्मचारी अपने मूल दायित्वों से हटकर अन्य कार्यालयों और संस्थानों में गैर शिक्षकीय कार्यों में संलग्न हैं, जिससे स्कूलों में पठन-पाठन और शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
कार्यवाही से DPI को अवगत कराने के निर्देश
डीपीआई ने ऐसे सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित शिक्षकों एवं कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर मूल शालाओं में ज्वाइनिंग सुनिश्चित करने को कहा है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित अधिकारियों को कार्यवाही पूर्ण कर निर्धारित समय सीमा में DPI को अवगत कराना होगा। विभागीय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शैक्षणिक कार्य प्रभावित न हों और शिक्षकों की सेवाएं प्राथमिक रूप से विद्यार्थियों के हित में उपयोग हों। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इस आदेश के अनुपालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें।

पिछले वर्ष भी जारी हुआ था आदेश
गौरतलब है कि इसी प्रकार के आदेश वर्ष 2024 में भी जारी किए गए थे, जिसमें गैर शिक्षकीय कार्यों में संलग्न शिक्षकों को कार्यमुक्त कर सात दिन के भीतर मूल शालाओं में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कहा गया था। बावजूद इसके, विभाग में संलग्नीकरण और गैर शिक्षकीय कार्यों में शिक्षकों की तैनाती की शिकायतें लगातार मिलती रही हैं। इस बार डीपीआई ने सख्त रुख अपनाते हुए अनुपालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। प्रशासन का उद्देश्य स्पष्ट है कि शिक्षक अपने मूल दायित्वों पर केंद्रित रहें और शैक्षणिक गतिविधियां सुचारु रूप से संचालित हों।



