रायपुर। कलिंगा विश्वविद्यालय द्वारा 28 फरवरी 2026 को जिला न्यायालय, संबलपुर में “साइबर लॉ एवं डिजिटल साक्ष्य” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न्यायालय परिसर में अधिवक्ता संघ, संबलपुर के सहयोग से संपन्न हुआ, जिन्होंने आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

संगोष्ठी में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं एवं विधि क्षेत्र से जुड़े सदस्यों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में अधिवक्ता प्रदीप कुमार बोहिदार (अध्यक्ष), अधिवक्ता प्रद्योत कुमार शर्मा (सचिव) एवं अधिवक्ता महेंद्र बधेई (संयुक्त सचिव) की गरिमामयी उपस्थिति रही, जो विधि समुदाय के संस्थागत समर्थन को दर्शाती है।

कार्यक्रम का मुख्य वक्तव्य एकता चंद्राकर, सहायक प्राध्यापक, विधि संकाय, कलिंगा विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने साइबर लॉ के विकसित होते आयामों, डिजिटल अपराधों, नियामक ढांचे तथा इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के साक्ष्यात्मक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्य की स्वीकार्यता से संबंधित वैधानिक प्रावधानों एवं प्रक्रियात्मक मानकों पर विशेष चर्चा की गई।


तकनीकी युग में डिजिटल माध्यमों पर बढ़ती निर्भरता एवं साइबर अपराधों से संबंधित वादों की संख्या में निरंतर वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए, संगोष्ठी में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के उपयोग में विधिक प्रावधानों एवं न्यायिक मानकों के पालन की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया।

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कार्यक्रम में परिवार न्यायालय के न्यायाधीशों, विशेष न्यायाधीशों, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीशों एवं सिविल न्यायाधीशों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जो न्यायपालिका के निरंतर विधिक उन्नयन एवं क्षमता विकास के प्रति प्रतिबद्ध दृष्टिकोण को दर्शाती है।

कलिंगा विश्वविद्यालय निरंतर ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करता रहा है, जो शैक्षणिक संस्थानों एवं न्यायपालिका के मध्य सार्थक संवाद स्थापित करने में सहायक हों। बार एवं बेंच के सदस्यों से प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रिया से उत्साहित होकर विश्वविद्यालय ने भविष्य में विभिन्न जिला न्यायालयों में इस प्रकार के विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।


कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ तथा विश्वविद्यालय ने विधि क्षेत्र में व्यावसायिक दक्षता को सुदृढ़ करने एवं न्याय वितरण प्रणाली को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।