बिहार की राजनीति में आज 5 मार्च का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज पटना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। इस कदम के साथ ही बिहार में करीब दो दशक से चले आ रहे ‘नीतीश युग’ के अंत और भाजपा के नेतृत्व वाली नई सरकार की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक सीएम पद की दौड़ में पांच नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। इनमें Samrat Choudhary, Nityanand Rai, Dilip Jaiswal, Vijay Kumar Sinha और भाजपा विधायक Sanjeev Chaurasia के नाम शामिल हैं।
सम्राट चौधरी
16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में जन्मे सम्राट चौधरी बिहार की राजनीति का एक प्रमुख चेहरा हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी छह बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी माता पार्वती देवी तारापुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। सम्राट चौधरी ने मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा।

उन्होंने 1999 में राबड़ी देवी सरकार में पहली बार कृषि मंत्री के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद वे 2000 और 2010 में परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। वर्ष 2010 में उन्होंने बिहार विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी भी निभाई।
सम्राट चौधरी पहले राजद और जदयू से जुड़े रहे, लेकिन 2014 में उन्होंने पार्टी से अलग होकर 13 विधायकों के साथ एक नया गुट बनाया और बाद में भाजपा में शामिल हो गए। उसी वर्ष जीतन राम मांझी की सरकार में उन्हें नगर विकास और आवास मंत्री बनाया गया। मार्च 2023 में भाजपा ने उन्हें बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाया। जनवरी 2024 में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद वे बिहार के उपमुख्यमंत्री बने और 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद भी इस पद पर बने रहे।
नित्यानंद राय
नित्यानंद राय बिहार भाजपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। हालिया लोकसभा चुनाव में उन्होंने राजद उम्मीदवार आलोक कुमार मेहता को 60 हजार से अधिक मतों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। 1966 में जन्मे नित्यानंद राय ने हाजीपुर स्थित राज नारायण कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की है।

लोकसभा पहुंचने से पहले वे लंबे समय तक हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। वे बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं और पार्टी संगठन को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बिहार की राजनीति में उन्हें भाजपा के प्रमुख यादव चेहरे के रूप में देखा जाता है।
दिलीप जायसवाल
डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल का जन्म 3 दिसंबर 1963 को बिहार के खगड़िया जिले के गोगरी में हुआ था। वे अत्यंत पिछड़ा वर्ग की कलवार जाति से आते हैं और उनकी शैक्षणिक योग्यता पीएचडी है।

वे करीब 22 वर्षों तक बिहार भाजपा के प्रदेश कोषाध्यक्ष रहे हैं। साथ ही वे राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। वर्ष 2009 में वे पहली बार पूर्णिया, अररिया और किशनगंज के स्थानीय प्राधिकरण से विधान परिषद सदस्य चुने गए थे। वर्तमान में वे बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।
विजय कुमार सिन्हा
विजय कुमार सिन्हा का जन्म 5 जून 1967 को लखीसराय जिले के तिलकपुर गांव में हुआ था। उन्होंने बेगूसराय के बरौनी स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है। छात्र राजनीति से अपनी पहचान बनाने वाले सिन्हा बिहार की राजनीति में एक प्रभावशाली नेता माने जाते हैं।

वर्ष 2017 में उन्हें बिहार सरकार में श्रम संसाधन मंत्री बनाया गया। 2020 में वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई प्रशासनिक सुधार किए। 2022 में राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्हें यह पद छोड़ना पड़ा। जनवरी 2024 में सरकार के पुनर्गठन के बाद उन्हें बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया गया और 2025 के चुनाव के बाद भी वे इस पद पर बने रहे।
संजीव चौरसिया
संजीव चौरसिया 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पटना के दीघा विधानसभा क्षेत्र से जीत दर्ज कर विधायक बने। उनकी शैक्षणिक योग्यता डॉक्टरेट है और वे पार्टी के सक्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। वर्तमान में उनका नाम भी मुख्यमंत्री पद की संभावित दौड़ में शामिल माना जा रहा है।



