टीआरपी डेस्क। मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण जंग और ग्लोबल सप्लाई चेन टूटने का असर अब सीधे भारतीय रसोई तक पहुंच गया है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण एलपीजी (LPG) गैस की सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है, जिसके बाद देश के महानगरों में हाहाकार मच गया है। दिल्ली में जहां गैस सिलेंडर की बुकिंग नहीं हो पा रही है, वहीं मुंबई में आसमान छूती कीमतों ने लोगों को ‘प्लान-बी’ अपनाने पर मजबूर कर दिया है।

गैस संकट ने बदला खाना बनाने का तरीका

बता दें कि मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत और कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के बाद लोगों ने अब गैस चूल्हों को अलविदा कहना शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि, लोग अब खाना बनाने के लिए पूरी तरह से बिजली से चलने वाले उपकरणों (Electrical Appliances) पर निर्भर हो रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में इलेक्ट्रॉनिक मार्केट में ग्राहकों की भीड़ 40% तक बढ़ गई है।

See also  कौशल मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ समेत इन राज्यों के 178 ट्रेनिंग पार्टनरों को किया ब्लैक लिस्ट, करोड़ों के भ्रष्टाचार का आरोप

बाजार में इन ‘इलेक्ट्रिक गैजेट्स’ की मची धूम

दरअसल, गैस की अनिश्चितता को देखते हुए लोग अब अपनी रसोई को स्मार्ट और इलेक्ट्रिक बना रहे हैं। मुंबई के क्रॉफर्ड मार्केट और रायपुर के गोलबाजार जैसे प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक हब में इन उपकरणों की मांग सबसे ज्यादा है।

इलेक्ट्रिक कुकर और मल्टी कुकर: चावल और दाल बनाने के लिए पहली पसंद।

इंडक्शन और इलेक्ट्रिक तवा: रोटियां सेंकने के लिए लोग अब गैस की जगह बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं।

एयर फ्रायर और माइक्रोवेव ओवन: तेल और गैस दोनों की बचत के लिए हाई डिमांड।

इलेक्ट्रिक स्टीमर और हॉट प्लेट: रोजमर्रा के छोटे कामों के लिए किफायती विकल्प।

दिल्ली-मुंबई में बुकिंग पर ‘ब्रेक’, रायपुर में भी बढ़ी चिंता

हैरानी की बात यह है कि दिल्ली के कई इलाकों में उपभोक्ताओं की शिकायत है कि गैस एजेंसियों के ऐप और पोर्टल पर ‘बुकिंग नॉट अवेलेबल’ का मैसेज आ रहा है। वहीं, मुंबई में लोग घंटों लाइन में लगने के बजाय इंडक्शन चूल्हा खरीदना बेहतर समझ रहे हैं।

See also  Paris Paralympics 2024 : पैरालंपिक में भारत को मिला दूसरा गोल्ड, नितेश कुमार ने बैडमिंटन में किया धांसू प्रदर्शन, तो योगेश कथूनिया ने…

क्या बिजली से खाना पकाना होगा सस्ता?

बता दें कि एक्सपर्ट्स का मानना है कि एलपीजी की बढ़ती कीमतों के मुकाबले इंडक्शन या इलेक्ट्रिक कुकर का इस्तेमाल करना अब मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बजट में फिट बैठ रहा है। हालांकि, इससे बिजली बिल बढ़ने का डर भी है, लेकिन गैस की अनुपलब्धता ने लोगों के पास कोई और विकल्प नहीं छोड़ा है।

प्रशासन की अगली कार्रवाई और जनता के लिए संदेश

सरकार की ओर से फिलहाल वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे पैनिक न करें और सौर ऊर्जा या बिजली उपकरणों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करें। आने वाले दिनों में यदि गैस संकट जारी रहा, तो सरकार बिजली दरों में कुछ राहत देने पर विचार कर सकती है ताकि आम जनता पर दोहरी मार न पड़े।