दुनियाभर में ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच मचे घमासान के बीच भारत ने कूटनीति के मोर्चे पर बाजी मार ली है। जहां समंदर के सबसे खतरनाक रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) में दुनिया के बड़े-बड़े देशों के जहाज डरे हुए हैं, वहीं ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को सुरक्षित गुजरने की हरी झंडी दे दी है। बता दें कि यह बड़ी कामयाबी भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच हुई सीक्रेट और हाई-लेवल बातचीत के बाद मिली है।

हैरानी की बात यह है कि जहां अमेरिका और यूरोप के जहाजों पर ईरान ने कड़े पहरे बिठा रखे हैं, वहीं भारत के दो बड़े टैंकर ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ शान से इस खतरनाक रास्ते को पार कर रहे हैं। दरअसल, ईरान ने साफ कर दिया है कि जो जहाज इस्राइल या अमेरिका के हितों से नहीं जुड़े हैं, उन्हें कोई खतरा नहीं होगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दो दिन पहले ही एक भारतीय कप्तान की कमान वाला जहाज सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर मुंबई बंदरगाह सुरक्षित पहुंच चुका है, जो इस जंग के बीच भारत पहुंचने वाला पहला जहाज है।

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क्यों होर्मुज के रास्ते पर टिकी है दुनिया की नजर?
बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच सिर्फ 55 किलोमीटर चौड़ा एक समुद्री रास्ता है, लेकिन इसकी अहमियत पूरी दुनिया के लिए ऑक्सीजन जैसी है।

  • दुनिया का लगभग 31% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
  • हर दिन करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई यहीं से होती है।
  • इराक, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों का व्यापार इसी रास्ते पर टिका है।

यही वजह है कि अगर यहां तनाव बढ़ता है, तो रायपुर से लेकर दिल्ली तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने लगती हैं। ईरान के पास ऐसी मिसाइलें और समुद्री सुरंगें हैं जो किसी भी जहाज को पल भर में राख कर सकती हैं, ऐसे में भारत को रास्ता मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
दरअसल, पिछले 12 दिनों से जारी इस जंग ने वैश्विक सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। जानकारों का कहना है कि भारत की ‘स्वतंत्र विदेश नीति’ का ही नतीजा है कि तेहरान ने हमें यह विशेष राहत दी है। इससे न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) सुनिश्चित होगी, बल्कि खाड़ी देशों में फंसे हजारों भारतीय कर्मियों को भी एक मनोवैज्ञानिक सुरक्षा मिलेगी।

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