रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का मंगलवार का दिन पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गया। सत्र के दौरान विपक्ष ने मनरेगा (MNREGA) की स्थिति पर स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरने की कोशिश की। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जैसे ही इस पर चर्चा की मांग रखी, सत्तापक्ष के तेवर भी सख्त हो गए। देखते ही देखते सदन के भीतर ऐसी तीखी नोक-झोंक शुरू हुई कि माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।
भूपेश बघेल और अजय चंद्राकर के बीच सीधी रार
दरअसल, स्थगन प्रस्ताव पेश होते ही भाजपा के फायरब्रांड नेता और विधायक अजय चंद्राकर ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सदन कांग्रेस की राजनीति का अड्डा नहीं है। इस पर भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए सत्तापक्ष को ललकारा। उन्होंने कहा, अगर सत्तापक्ष में दम है तो स्थगन स्वीकार करे, हम चर्चा के लिए तैयार हैं। इस बहस ने इतना उग्र रूप लिया कि आसंदी को सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
नेता प्रतिपक्ष और राजेश मूणत के बीच जुबानी जंग
कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मोर्चा संभाला। उन्होंने दोटूक कहा कि सत्तापक्ष गरीबों की मांगों पर चर्चा से डर रहा है। इसी बीच भाजपा विधायक राजेश मूणत ने यह कहकर आग में घी डाल दिया कि इन्हें दो महीने बाद मनरेगा की याद आ रही है। इस टिप्पणी के बाद सदन में फिर से हंगामा बरप गया।
सदन का बहिष्कार और वॉकआउट
ग्राउंड सूत्रों ने बताया कि जब सभापति की ओर से स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य (रिजेक्ट) कर दिया गया, तो कांग्रेस विधायक भड़क उठे। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने साफ कहा कि जहां गरीबों की बात नहीं सुनी जाएगी, वहां रहने का कोई मतलब नहीं है। इसके तुरंत बाद पूरी कांग्रेस टीम ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया और बाहर निकल गए।
विधानसभा के इस हंगामे ने यह साफ कर दिया है कि मनरेगा का मुद्दा आने वाले दिनों में सड़क पर भी गूंजेगा। रायपुर के स्थानीय जानकारों का कहना है कि विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर सीधे मजदूरों के बीच जाने की तैयारी में है। सत्तापक्ष और विपक्ष की इस रार में फिलहाल उन हजारों मजदूरों की उम्मीदें लटकी हुई हैं, जिनके हक की बात आज सदन में होनी थी।



