भूपदेवपुर (रायगढ़)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के भूपदेवपुर क्षेत्र में स्थित बिलासपुर जलाशय (डैम) का एक हिस्सा और पुराना जर्जर गेट अचानक टूट जाने से क्षेत्र में जल-प्रलय जैसी स्थिति निर्मित हो गई। देर रात हुई इस घटना के बाद जलाशय का पानी अनियंत्रित तरीके से बाहर निकलने लगा, जिससे एक दर्जन से अधिक गांवों में पानी घुस गया है। अचानक आई इस बाढ़ से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं।

NH-49 बना दरिया, यातायात पूरी तरह बाधित

डैम का हिस्सा टूटने से निकला पानी सीधे रायगढ़-खरसिया राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-49) पर आ गया। हाईवे पर घुटनों तक पानी भर जाने के कारण वाहनों के पहिए थम गए हैं और सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई हैं। प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से इस मार्ग पर आवाजाही रोक दी।

गांवों में मची चीख-पुकार

पानी का बहाव इतना तेज था कि देखते ही देखते निचले इलाकों में स्थित गांवों के घरों और खेतों में पानी भर गया। ग्रामीणों के अनुसार, वे रात में सो रहे थे तभी अचानक पानी की आवाज और शोर सुनकर उनकी नींद खुली। कई घरों का सामान और फसलें पानी में डूब गई हैं। प्रभावित गांवों में भूपदेवपुर, तारापुर और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।

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राहत और बचाव कार्य जारी

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई है। प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। जल संसाधन विभाग के इंजीनियर मौके पर मौजूद हैं और बांध के बहाव को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए नावों और ट्रैक्टरों की मदद ली जा रही है।

किसानों की फसल बर्बाद

बांध का पानी गांव में आने से किसानों की फसल डूब गई है। ऐसे में बड़े मात्रा में किसानों की फसल खराब होने का अनुमान है। वहीं, मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के एक-दो स्थानों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। जिससे तापमान में गिरावट दर्ज होगी और कड़ाके की ठंड होगा।

कलेक्टर ने स्थिति को जल्द नियंत्रण में लेने और नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देने का आश्वासन दिया है।

स्थानीय प्रशासन ने सड़क किनारे और पानी के तेज बहाव वाले क्षेत्रों से लोगों को दूर रहने की चेतावनी जारी की है। पुलिस और राजस्व विभाग की टीम लगातार जलाशय के गेट और आसपास के क्षेत्र की निगरानी कर रही है।

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बहरहाल यह घटना रायगढ़ जिले में जलाशयों की पुरानी संरचनाओं के रखरखाव और समय पर मरम्मत की आवश्यकता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते संरचनात्मक जांच और सुधार नहीं किए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं का जोखिम लगातार बढ़ता रहेगा।