गरियाबंद। जिले में एक पानी टंकी के गायब होने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। इसकी शिकायत बकायदा पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने थाने पहुंचकर दर्ज करायी है। पंचायत की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने 3 लाख रुपए के मंजूर निर्माण कार्य की गुमशुदगी की शिकायत थाने में दर्ज करायी है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य की इस शिकायत के बाद एक बार फिर पंचायतों में होने वाले कार्यों पर सवालिया निशान लग गया है।

जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला देवभोग थाना क्षेत्र के चिचिया पंचायत के दासोपारा गांव का है। बताया जा रहा है कि गांव में पेयजल संकट को देखते हुए पूर्व जिला पंचायत सदस्य धनमति यादव ने पानी टंकी और पाइपलाइन विस्तार के लिए 3 लाख रुपए की मंजूरी दिलाई थी। आधी रकम एडवांस के रूप में निकल भी गई, लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी जमीन पर काम का नामोनिशान नहीं है। यानी फाइल चली, मंजूरी मिली, पैसा गया….बस काम कहीं रास्ते में ही “लापता” हो गया।

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पिछले 6 महीनों से पूर्व जिप सदस्य धनमति यादव जनपद से लेकर जिला पंचायत कार्यालय तक चक्कर काटती रहीं, लेकिन जवाब वही पुराना देखते हैं।” जब कहीं से सुनवाई नहीं हुई, तो उन्होंने थाने पहुंचकर बाकायदा लिखित शिकायत दे दी कि उनका स्वीकृत निर्माण कार्य “गुम” हो गया है, कृपया खोजा जाए। पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए धारा 155 के तहत कागज देकर “औपचारिकता” निभा दी। अब शायद अगला कदम यह होगा कि लापता टंकी का पोस्टर छपे “कहीं दिखे तो नजदीकी थाने में सूचना दें।”

इकलौते हैंडपंप के सहारे सैकड़ों ग्रामीणइधर, दासोपारा गांव के 600 ग्रामीण अब भी एकमात्र हैंडपंप के सहारे हैं। जहां सुबह-शाम पानी भरने के लिए लंबी कतारें लगती हैं। महिलाओं के लिए यह रोज का संघर्ष है, लेकिन सिस्टम के लिए शायद यह सिर्फ एक और फाइल है। यह पूरा मामला सवाल खड़ा करता है कि क्या योजनाएं सिर्फ कागजों में पूरी हो जाती हैं ? और अगर हां, तो क्या अब हर अधूरे काम की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखानी पड़ेगी ? अब देखने वाली बात होगी कि इस पूरे मामले को अफसर कितनी गंभीरता से लेते हैं। हालांकि इतना तय है कि इस शिकायत ने पंचायत स्तर पर फैली भर्राशाही और कथित भ्रष्टाचार की परतें फिर से उधेड़ दी हैं—जहां कागजों में विकास दौड़ता है, लेकिन ज़मीन पर काम अक्सर “गुमशुदा” ही मिलता है।

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