कलेक्टर ने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर काम करने के दिए निर्देश।

टीआरपी। सूरजपुर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। कलेक्टर रेना जमील ने हाल ही में आयोजित एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कुपोषण नियंत्रण, बाल विवाह की रोकथाम और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यह बैठक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति सुधारने और जिले में बाल विवाह जैसी कुरीतियों को जड़ से खत्म करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों तक पहुँचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर ने मुख्य रूप से कुपोषित एवं अल्पवजन बच्चों की स्थिति और आंगनवाड़ी केंद्रों में दी जा रही पोषण सामग्री की गुणवत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और यदि कार्यों में ढिलाई पाई जाती है, तो संबंधित कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक समस्या पर प्रशासन ने शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई है। इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, महतारी वंदन योजना, आधार कार्ड और आयुष्मान कार्ड निर्माण जैसे कार्यों में तेजी लाने के लिए विशेष शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य फोकस: कुपोषण नियंत्रण, बाल विवाह रोकथाम, और मातृ-शिशु स्वास्थ्य।

प्रमुख निर्देश: आंगनवाड़ी केंद्रों की निरंतर निगरानी और लापरवाही पर कार्रवाई।

योजनाओं की गति: विशेष शिविरों के माध्यम से आधार, आयुष्मान कार्ड और अन्य योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन।

बुनियादी ढांचा: निर्माणाधीन पीएचसी (PHC) और सीएचसी (CHC) भवनों को शीघ्र पूर्ण करने के आदेश।

प्रशासन की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद, अब स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग की टीमें जमीनी स्तर पर कार्य करेंगी। आने वाले दिनों में आंगनवाड़ी केंद्रों के निरीक्षण और बाल विवाह रोकथाम के लिए सक्रिय निगरानी देखने को मिल सकती है।

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