टीआरपी। छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंक राम वर्मा ने प्रशासनिक तामझाम और वीआईपी कल्चर को दरकिनार करते हुए अपने शासकीय दौरों से ‘पायलट’ और ‘फॉलो’ वाहनों के उपयोग को तत्काल प्रभाव से बंद करने का बड़ा निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा बचत एवं संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के आह्वान से प्रेरित होकर उन्होंने यह अनुकरणीय पहल की है।
छत्तीसगढ़ में राजनेताओं और मंत्रियों के काफिले के कारण अक्सर आम जनता को ट्रैफिक जाम और प्रशासनिक असुविधा का सामना करना पड़ता है। मंत्री टंक राम वर्मा के इस फैसले से न केवल सरकारी और प्रशासनिक खर्चों में भारी कमी आएगी, बल्कि आम नागरिकों के बीच ईंधन संरक्षण (Fuel Conservation) और सादगी का एक बड़ा संदेश जाएगा।
खुद से शुरुआत कर पेश की मिसाल
कैबिनेट मंत्री टंक राम वर्मा ने इस फैसले पर बात करते हुए कहा कि देशहित से जुड़ी किसी भी पहल की शुरुआत हम जनप्रतिनिधियों को स्वयं से करनी चाहिए। उन्होंने अपने स्टाफ की गाड़ियों की संख्या में भी भारी कटौती की है और अब वे बेहद सीमित गाड़ियों के काफिले में सफर करेंगे। राज्य स्तर पर उनके इस कदम को जनता के प्रति जवाबदेही और सादगी के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।
इस फैसले के बाद रायपुर सहित पूरे प्रदेश के विभिन्न सामाजिक संगठनों, प्रबुद्धजनों और आम नागरिकों ने मंत्री वर्मा की सराहना की है। लोगों का कहना है कि राजनेताओं द्वारा फिजूलखर्ची रोकने की यह पहल वाकई प्रेरणादायी है, जो एक जमीन से जुड़े नेता की पहचान को और मजबूत करती है।
तारीख: 18 मई 2026 को मंत्री ने आधिकारिक तौर पर वीआईपी सुरक्षा काफिला छोड़ने का निर्णय लिया।
प्रमुख कटौती: शासकीय दौरों में मिलने वाले ‘पायलट’ और ‘फॉलो’ वाहनों के उपयोग पर पूरी तरह से रोक।
स्टाफ में बदलाव: मंत्री के साथ चलने वाले विभागीय स्टाफ की गाड़ियों की संख्या में भी भारी कटौती की गई है।
मंत्री टंक राम वर्मा की इस पहल के बाद अब छत्तीसगढ़ के अन्य मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों पर भी वीआईपी कल्चर छोड़ने और सरकारी संसाधनों की बचत करने का नैतिक दबाव बढ़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में प्रशासनिक व्यवस्था में और सुधार देखने को मिल सकता है।



