शौर्य चक्र विजेता वीर जवानों और उनके परिजनों से मुलाकात करते उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा।

टीआरपी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों नई दिल्ली में “शौर्य चक्र” से सम्मानित होकर लौटे छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों से उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने आज मुलाकात की। नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में गृह मंत्री ने जवानों और उनके गौरवान्वित परिजनों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उन्हें पूरे प्रदेश की तरफ से बधाई दी।

उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार सुरक्षा बलों के जवानों के सम्मान, उनके कल्याण और उनके परिवारों की मुकम्मल सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी इन वीर परिवारों को किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी।

यह सम्मान छत्तीसगढ़ पुलिस और यहां के युवाओं के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। कांकेर के घने जंगलों में नक्सलियों को धूल चटाने वाले स्थानीय पुलिस अफसरों और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर दुश्मनों को खदेड़ने वाले छत्तीसगढ़ के जवान को ‘शौर्य चक्र’ मिलना यह साबित करता है कि राज्य के जवान देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिए सबसे मजबूत दीवार हैं।

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शौर्य की अमर गाथा और सम्मान


इस बेहद खास मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के साथ डीजीपी अरुण देव गौतम भी मौजूद रहे। गृह मंत्री ने शौर्य चक्र से सम्मानित इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट, इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख और राइफलमैन भोज राम साहू के अदम्य साहस की कहानियों को खुद उनके मुंह से सुना। उन्होंने कहा कि देश सेवा के इस गौरवपूर्ण सफर में जितना योगदान जवानों का है, उतना ही बड़ा त्याग उनके परिवारों का भी है, जिन्होंने हर कठिन परिस्थिति में इनका साथ दिया।

कांकेर मुठभेड़ के हीरो: छत्तीसगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट और इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख ने 16 अप्रैल 2024 को कांकेर क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े और सफल अभियान का नेतृत्व किया था। घने जंगलों के बीच रणनीतिक कौशल और अद्वितीय साहस का परिचय देते हुए इन जांबाजों ने नक्सलियों को ढेर कर दिया था।

घायल होने के बाद भी नहीं छोड़ी पोस्ट: वहीं, 3 असम राइफल्स के राइफलमैन भोज राम साहू (मूल निवासी छत्तीसगढ़) को भारत-म्यांमार सीमा पर घुसपैठ विरोधी अभियान के दौरान तैनात किया गया था। इस दौरान वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे, लेकिन खून बहने के बावजूद उन्होंने मोर्चा नहीं छोड़ा और अकेले दम पर दुश्मनों को पीछे हटने के लिए मजबूर कर दिया।

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सम्मानित वीर: छत्तीसगढ़ के कुल 3 जांबाजों (2 पुलिस इंस्पेक्टर और 1 असम राइफल्स के राइफलमैन) को राष्ट्रपति ने शौर्य चक्र दिया।

ऐतिहासिक तारीख: 16 अप्रैल 2024 को कांकेर में हुए बड़े नक्सल विरोधी ऑपरेशन के लिए पुलिस अधिकारियों को यह सम्मान मिला।

शौर्य चक्र से सम्मानित इन वीर जवानों की बहादुरी की कहानियों को छत्तीसगढ़ के पुलिस ट्रेनिंग सेंटरों और स्कूलों में एक प्रेरणा स्रोत के रूप में शामिल किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने माटी के वीरों के बलिदान और साहस से सीख ले सकें।