टीआरपी डेस्क। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों और भोलेनाथ के जयकारों के बीच देश की सबसे पवित्र और प्रसिद्ध अमरनाथ यात्रा शुक्रवार से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। इस साल यह पवित्र यात्रा पूरे 57 दिनों तक चलेगी। यात्रा का पहला जत्था जम्मू कश्मीर के गांदरबल जिले के बालटाल और अनंतनाग जिले के पहलगाम बेस कैंप से अलसुबह बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए आगे बढ़ चुका है। पहले जत्थे में कुल 4822 उत्साही श्रद्धालु शामिल हैं, जो कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मुख्य गुफा की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं।

पहले दिन 9 हजार लोग करेंगे दर्शन, कल रवाना होगा दूसरा जत्था

प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक बाबा के दर्शन के लिए यह सभी श्रद्धालु गुरुवार शाम को ही कश्मीर के दोनों मुख्य बेस कैंपों में पहुंच गए थे। जम्मू कश्मीर प्रशासन का अनुमान है कि पहले जत्थे के इन श्रद्धालुओं के साथ सुरक्षा बल के जवान और अन्य व्यवस्थाओं में लगे लोगों को मिलाकर कुल 9000 लोग आज शाम तक पवित्र गुफा पहुंचकर दर्शन कर लेंगे। इस बीच यात्रा का दूसरा जत्था भी शुक्रवार देर शाम तक कश्मीर पहुंच जाएगा। इस दूसरे जत्थे में कुल 3865 श्रद्धालु शामिल हैं, जिन्हें शनिवार सुबह आगे रवाना किया जाएगा। कश्मीर में लगातार हो रही बारिश और बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने सभी यात्रियों को दर्शन करने के तुरंत बाद वापस नीचे लौटने की सख्त सलाह दी है।

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हर 2 किलोमीटर पर ऑक्सीजन बूथ, मौसम पर नजर रखने के लिए लगीं बड़ी स्क्रीन

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए इस बार अमरनाथ यात्रा मार्ग पर बेहद आधुनिक इंतजाम किए गए हैं। दुर्गम पहाड़ियों और कम ऑक्सीजन वाले इलाकों को देखते हुए पूरे यात्रा मार्ग पर हर 2 किलोमीटर की दूरी पर विशेष ऑक्सीजन बूथ बनाए गए हैं। इसके अलावा दोमेल वाले रास्ते पर 4 अलग-अलग जगहों पर बड़ी डिजिटल स्क्रीन लगाई गई हैं, जिनके जरिए लगातार पल-पल के मौसम की सही जानकारी श्रद्धालुओं को दी जा रही है। बालटाल वाले रास्ते पर अचानक होने वाली बारिश से बचने के लिए 12 जगहों पर मजबूत वाटरप्रूफ डोम यानी सुरक्षित टेंट बनाए गए हैं। आपको बता दें कि यह यात्रा दो रास्तों से होती है। पहला पारंपरिक रास्ता पहलगाम से है जो 48 किलोमीटर लंबा है और दूसरा छोटा रास्ता बालटाल से है जो 14 किलोमीटर लंबा है। यह यात्रा 28 अगस्त को समाप्त होगी।

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दोनों रास्तों पर बने 100-100 बेड के अस्पताल, तैनात किए 1000 स्वास्थ्यकर्मी

पहाड़ों पर चढ़ते समय श्रद्धालुओं को सेहत से जुड़ी कोई परेशानी न हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने दोनों रास्तों पर बेहद मजबूत तैयारी की है। दोनों ही मार्गों पर 1000 से ज्यादा डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही दोनों रूट पर 100-100 बेड के आधुनिक और अस्थायी अस्पताल तैयार किए गए हैं। बालटाल वाले रास्ते पर चलते समय अगर तबीयत बिगड़ती है, तो सबसे पहले डोमेल गेट के पास ही मेडिकल एड सेंटर यानी प्राथमिक उपचार केंद्र बनाया गया है। इसके आगे बढ़ने पर रेलपथरी, बरारी और संगम टॉप पर भी आपातकालीन चिकित्सा केंद्र और ऑक्सीजन की सुविधा मौजूद है।

पहलगाम मार्ग पर रुकने और इलाज की है विशेष व्यवस्था

पारंपरिक पहलगाम मार्ग से जाने वाले यात्रियों के लिए नुनवान बेस कैंप पर ही एक बड़ा अस्पताल शुरू किया गया है। इसके आगे चंदनवाड़ी नाम की जगह पर 100 बिस्तरों का मुख्य बेस अस्पताल बनाया गया है, जहां चढ़ाई शुरू करने से पहले यात्री अपनी सेहत की जांच करवा सकते हैं। रास्ते में आगे बढ़ने पर पिस्सू टॉप पर भी प्राथमिक उपचार केंद्र की सुविधा उपलब्ध है। इसके बाद जो यात्री शेषनाग कैंप में रात को रुकते हैं, उनके लिए भी वहां पर एक बड़ा बेस अस्पताल रात-दिन काम कर रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों को तुरंत इलाज मिल सके।

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