Conjunctivitis symptoms: मानसून के मौसम में नमी और उमस बढ़ने के साथ ही देश भर में कंजंक्टिवाइटिस यानी ‘पिंक आई’ का खतरा तेजी से बढ़ गया है। गंदे हाथों, संक्रमित वस्तुओं और आपसी संपर्क के माध्यम से यह आंखों की बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे में बहुत तेजी से फैल रही है। खासकर बच्चों और परिवार के सदस्यों के बीच इस बीमारी का जोखिम सबसे अधिक देखा जा रहा है। बारिश के इस दौर में अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए, तो यह साधारण सा दिखने वाला संक्रमण पूरे परिवार को अपनी चपेट में ले सकता है।
अक्सर लोगों के बीच यह भ्रम रहता है कि मरीज की आंखों में देखने से यह बीमारी फैलती है, जबकि सच्चाई यह है कि कंजंक्टिवाइटिस सीधे या अप्रत्यक्ष शारीरिक संपर्क से फैलता है। पीड़ित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किए गए तौलिये, रुमाल, तकिए के कवर, मोबाइल फोन या गंदे हाथों से आंखों को छूने पर इसका वायरस दूसरों तक पहुंचता है। संक्रमण की शुरुआत में आंखों का रंग लाल या गुलाबी होना, लगातार पानी बहना, खुजली, जलन और सुबह उठने पर पलकों का आपस में चिपक जाना इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा रोशनी के प्रति संवेदनशीलता और आंखों में चुभन या किरकिरापन भी महसूस होता है।
संक्रमण की अवधि और जोखिम का समय
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, यह संक्रमण आमतौर पर 7 से 14 दिनों तक बना रहता है। जब तक आंखों से पानी बहना बंद न हो और लालिमा पूरी तरह खत्म न हो जाए, तब तक मरीज से दूसरों में वायरस फैलने का खतरा बना रहता है। शुरुआत के 3 से 5 दिनों में यह संक्रमण सबसे ज्यादा आक्रामक और संक्रामक होता है। स्कूल जाने वाले बच्चे अपनी सहपाठियों से बहुत जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं और फिर घर लौटने पर माता-पिता या भाई-बहन भी इससे पीड़ित हो जाते हैं। आमतौर पर यह संक्रमण पहले एक आंख में होता है और सही देखभाल न मिलने पर दूसरी आंख में भी फैल जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों की राय
वायरल कंजंक्टिवाइटिस मानसून में होने वाला सबसे आम प्रकार है। आंखों को बार-बार छूने या रगड़ने से बचना ही इसका सबसे प्राथमिक बचाव है। यदि किसी व्यक्ति की आंखों में तेज दर्द हो रहा हो, धुंधला दिखाई दे रहा हो, आंखों के आसपास अत्यधिक सूजन आ गई हो या गाढ़ा पीला-हरा पानी निकल रहा हो, तो बिना देर किए नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। खुद से कोई भी आई ड्रॉप डालना आंखों की रोशनी के लिए हानिकारक हो सकता है।
किस वर्ग को सबसे ज्यादा खतरा ?
इस मौसमी बीमारी के बढ़ने से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति और दफ्तरों में कामकाज प्रभावित हो रहा है। आंखों के डॉक्टरों के पास इन दिनों मरीजों की संख्या में भारी इजाफा दर्ज किया गया है। यदि कार्यस्थलों और शैक्षणिक संस्थानों में सही स्वच्छता मानकों का पालन नहीं किया गया, तो यह संक्रमण एक बड़े सामुदायिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है। हालांकि, व्यक्तिगत स्तर पर स्वच्छता और सतर्कता बरतकर इस बीमारी की रफ्तार को आसानी से रोका जा सकता है।
कैसे बरते सावधानियां?
मानसून के दिनों में आंखों की सुरक्षा के प्रति थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। साबुन-पानी से बार-बार हाथ धोना, अपनी निजी चीजों को साझा न करना और लक्षण दिखते ही खुद को आइसोलेट कर लेना सबसे सुरक्षित रास्ता है। अगर आंखों में कोई भी असुविधा महसूस हो रही हो, तो घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय तुरंत डॉक्टरी सलाह लें, ताकि संक्रमण को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
कंजंक्टिवाइटिस से बचाव के आसान उपाय
हाथों की सफाई: दिन में कई बार हाथों को साबुन और साफ पानी से धोएं।
चीजें शेयर न करें: तौलिया, रुमाल, तकिया, आई मेकअप या कॉन्टैक्ट लेंस दूसरों के साथ न बांटें।
आंखों से दूरी: बिना हाथ धोए आंखों को बार-बार न छुएं और न ही मसलें।
सार्वजनिक सतहों का सेनेटाइजेशन: घर और ऑफिस में बार-बार छुई जाने वाली जगहों की नियमित सफाई करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: क्या किसी की लाल आंखों में देखने से कंजंक्टिवाइटिस होता है?
उत्तर: नहीं, केवल देखने से यह बीमारी नहीं फैलती। यह गंदे हाथों, तौलिये या संक्रमित वस्तुओं को छूने से फैलती है।
Q2: कंजंक्टिवाइटिस का संक्रमण कितने दिनों तक रहता है?
उत्तर: आमतौर पर यह संक्रमण 7 से 14 दिनों तक रहता है। शुरुआती 3 से 5 दिनों में इसके फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
Q3: बच्चों में कंजंक्टिवाइटिस होने पर क्या करना चाहिए?
उत्तर: बच्चे को तुरंत स्कूल भेजने से रोकें, डॉक्टर से परामर्श लें और उसकी निजी इस्तेमाल की वस्तुओं को अलग रखें।
Q4: कंजंक्टिवाइटिस में कौन से लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
उत्तर: आंखों में तेज दर्द, धुंधलापन, अत्यधिक सूजन या पीला-हरा गाढ़ा पानी आने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
Q5: क्या कंजंक्टिवाइटिस में मेडिकल स्टोर से लेकर कोई भी आई ड्रॉप डाल सकते हैं?
उत्तर: बिल्कुल नहीं, डॉक्टर की लिखित सलाह के बिना कोई भी आई ड्रॉप डालना आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।


