Chhattisgarh Weather Update: छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है और रायपुर मौसम केंद्र ने 22 जुलाई से अगले 5 दिनों तक पूरे प्रदेश में मूसलाधार बारिश और वज्रपात की गंभीर चेतावनी जारी की है। उत्तरी छत्तीसगढ़ और उससे सटे इलाकों के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) पूरे राज्य को अपनी आगोश में ले रहा है, जिससे 27 जुलाई तक बिलासपुर, रायपुर, सरगुजा और बस्तर संभाग के अधिकांश हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की आशंका जताई गई है। रायपुर समेत मैदानी इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने की संभावना है।
मौसम विभाग से प्राप्त ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीते 24 घंटों में रायगढ़ जिले में सबसे ज्यादा 130 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा पेंड्रा में 120 मिमी, पुसौर और तमनार में 100 मिमी तथा बरपाली में 90 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। सरसीवा, खरसिया, लटोरी, नवागढ़ और अमलीपदर जैसे ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में 60 से 70 मिमी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बिलासपुर और सरगुजा संभाग में पिछले दो दिनों से हो रही वर्षा के कारण कई स्थानीय नदियां खतरे के निशान के पास पहुंच गई हैं।
चक्रवाती परिसंचरण और मानसूनी द्रोणिका का प्रभाव
इस मानसूनी तंत्र के पीछे की मुख्य वजह समुद्र तल पर बनी मानसूनी द्रोणिका (Monsoon Trough) है, जो गंगानगर, रोहतक, हमीरपुर, सीधी, रांची और दीघा से होकर उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इसके अलावा उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र सक्रिय है। वहीं उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ है, जो दक्षिण की ओर झुका है। इन्हीं मजबूत प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से प्रदेश में व्यापक वर्षा हो रही है।
मौसम विभाग ने क्या कहा ?
“उत्तरी छत्तीसगढ़ और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण राज्य भर में मानसूनी गतिविधियां बेहद मजबूत हुई हैं। 23 से 27 जुलाई के दौरान प्रदेश के एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा और आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने का खतरा बना रहेगा। आम जनता को खुले में जाने से बचने और नदी-नालों के पास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।”
नदी-नाले उफान पर
तटीय और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। लोरमी में मनियारी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से सुरक्षा दीवार ढह गई है, जिसके बाद प्रशासन ने एहतियातन बैरिकेडिंग कर रास्ते को बंद कर दिया है। सूरजपुर जिले के रामानुजनगर में मोहनपुर झींक नदी के पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण श्यामपुर और उमेश्वरपुर का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। बिलासपुर के कोनी और सेंदरी इलाके में सैकड़ों एकड़ धान के खेत जलमग्न हो गए हैं, जिससे रोपाई कर चुके किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।
बड़ी सकती है समस्या
छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिनों तक बारिश का यह दौर जारी रहने से जलभराव और आवागमन की समस्याएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बारिश से भूमिगत जलस्तर में सुधार होगा और धान की फसल को राहत मिलेगी, लेकिन निचले इलाकों में जल निकासी न होने पर फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासनों ने राहत एवं बचाव टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है।


