बिलासपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने SAS भाग-दो, 2017 की विभागीय परीक्षा के परिणाम को रद्द कर दिया है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने माना कि परीक्षा में विज्ञापित पाठ्यक्रम से बाहर के सवाल पूछे गए और परीक्षा से कुछ घंटे पहले एडमिट कार्ड में नया विषय जोड़ दिया गया।
कोर्ट ने इसे परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता के खिलाफ बताया। साथ ही वित्त विभाग को नया स्पष्ट सिलेबस जारी कर पात्र कर्मचारियों को तैयारी का पर्याप्त समय देने के बाद परीक्षा फिर से कराने की छूट दी है।
क्या था पूरा मामला ?
वित्त विभाग ने अप्रैल 2017 में SAS भाग-दो की विभागीय पदोन्नति परीक्षा का विज्ञापन निकाला था। परीक्षा 8 से 14 अगस्त 2017 तक हुई थी।
पेपर-V के लिए विज्ञापन और वेबसाइट पर “कंपनी अकाउंट्स एंड स्टोर कंट्रोल” विषय निर्धारित था। लेकिन याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि प्रश्नपत्र में पूछे गए सभी 7 सवाल “कॉस्ट एकाउंटेंसी” से थे। जबकि ये विषय विज्ञापित सिलेबस में था ही नहीं।
परीक्षा से कुछ घंटे पहले पता चला नया विषय
याचिकाकर्ता अमर सिंह बिसेन, दिनेश कुमार सिंह समेत अन्य कर्मचारियों ने कोर्ट को बताया कि “कॉस्ट एकाउंटेंसी” का जिक्र सिर्फ एडमिट कार्ड और टाइम टेबल में किया गया था।
कई अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर पहुंचने के बाद, यानी परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही नए विषय के बारे में जानकारी मिली। बिना तैयारी के उन्हें उस विषय में परीक्षा देनी पड़ी।
आपत्ति खारिज होने पर पहुंचे हाई कोर्ट
रिजल्ट आने के बाद अभ्यर्थियों ने RTI से उत्तरपुस्तिकाएं लीं और आउट ऑफ सिलेबस सवालों पर आपत्ति दर्ज कराई। लेकिन विभागीय समिति ने इसे “टाइपोग्राफिकल त्रुटि” बताकर अभ्यावेदन खारिज कर दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं ?
याचिकाकर्ताओं के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता अमृतो दास ने कहा कि अभ्यर्थी विज्ञापित सिलेबस के आधार पर ही तैयारी करते हैं। परीक्षा से ठीक पहले नियम बदलना उस सिद्धांत के खिलाफ है कि “खेल शुरू होने के बाद नियम नहीं बदले जा सकते”।
वहीं राज्य शासन की ओर से कहा गया कि कॉस्ट एकाउंटेंसी पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के BCom द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम में है और इसका उल्लेख एडमिट कार्ड में था। विज्ञापन में नाम छूट जाना सिर्फ लिपिकीय गलती थी।
जस्टिस बीडी गुरु ने अपने फैसले में क्या कहा ?
कोर्ट ने राज्य की दलील को खारिज करते हुए कहा:
“यदि विज्ञापन में विषय छूट गया था तो परीक्षा से पहले विधिवत संशोधन पत्र या नई अधिसूचना जारी करनी चाहिए थी। साथ ही परीक्षा की तिथि बढ़ाकर अभ्यर्थियों को तैयारी का समय देना जरूरी था।”
कोर्ट ने आगे कहा “एडमिट कार्ड विज्ञापित पाठ्यक्रम में संशोधन का विकल्प नहीं हो सकता। परीक्षा के ठीक पहले नया विषय जोड़कर परीक्षा लेना पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।”
कोर्ट का अंतिम आदेश
हाई कोर्ट ने 20 दिसंबर 2017 के SAS भाग-दो परीक्षा परिणाम को रद्द कर दिया। साथ ही 22 नवंबर 2024 का वो आदेश भी रद्द किया जिसमें विभाग ने अभ्यर्थियों की आपत्तियां खारिज की थीं।
कोर्ट ने वित्त विभाग को निर्देश दिया कि वो नियमों के अनुसार स्पष्ट और पूर्ण सिलेबस विधिवत अधिसूचित करे। पात्र कर्मचारियों को पर्याप्त तैयारी का अवसर देने के बाद ही परीक्षा नए सिरे से आयोजित की जाए।
FAQ: SAS 2017 परीक्षा रद्द मामला
सवाल 1. कौन सी परीक्षा रद्द हुई ?
छत्तीसगढ़ अधीनस्थ लेखा सेवा SAS भाग-दो, 2017 की विभागीय परीक्षा। ये परीक्षा पदोन्नति के लिए होती है।
सवाल 2. रद्द करने की वजह क्या बनी ?
पेपर-V में विज्ञापित सिलेबस से बाहर “कॉस्ट एकाउंटेंसी” के सवाल पूछे गए। और ये विषय परीक्षा से कुछ घंटे पहले एडमिट कार्ड में जोड़ा गया।
सवाल 3. कोर्ट ने किसे राहत दी ?
अमर सिंह बिसेन, दिनेश कुमार सिंह समेत सभी याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों को राहत मिली। 2017 का पूरा परिणाम रद्द कर दिया गया।
सवाल 4.अब आगे क्या होगा ?
वित्त विभाग को नया स्पष्ट सिलेबस जारी करना होगा। सभी पात्र कर्मचारियों को तैयारी का समय देकर परीक्षा फिर से करानी होगी।
सवाल 5. किस जज ने फैसला सुनाया ?
जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने ये फैसला सुनाया।


