कोरबा। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में बनाए गए अटल परिसर में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगने लगे हैं। कोरबा जिले के कटघोरा नगर पालिका में बनी मूर्ति को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि ब्रॉन्ज की जगह सस्ती धातु की मूर्ति लगाकर लाखों का बंदरबांट कर दिया गया।
बारिश में परत उखड़ने के बाद मामले की जांच शुरू हुई तो मूर्ति मानक के अनुरूप नहीं पाई गई। प्रदेश के 187 नगरीय निकायों में बनी अटल प्रतिमाओं की अब जांच की मांग उठ रही है।

क्या है पूरा मामला ?
छत्तीसगढ़ सरकार ने सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर बनाकर वहां अटल जी की आदमकद प्रतिमा स्थापित की है। कटघोरा नगर पालिका परिषद में इसका निर्माण ठेकेदार मनोज अग्रवाल को दिया गया था।
आरोप है कि ठेकेदार ने काम भाजयुमो कटघोरा मंडल अध्यक्ष को पेटी कॉन्ट्रैक्ट पर दे दिया। निर्माण के बाद सबसे बड़ा विवाद मूर्ति की गुणवत्ता को लेकर सामने आया।
ब्रॉन्ज की जगह लगा दी सस्ती धातु
योजना के अनुसार परिसर में ब्रॉन्ज यानी कांस्य की मूर्ति लगनी थी। इसकी अनुमानित लागत 13-14 लाख रुपये तय थी। ठेकेदार ने 10 लाख रुपये की दर पर रेट भरा था। लेकिन आरोप है कि ब्रॉन्ज की जगह घटिया धातु की मूर्ति बनाकर उस पर सिर्फ ब्रॉन्ज रंग का पेंट कर दिया गया। हाल की बारिश में पेंट की परत जगह-जगह से उखड़ गई और अंदर की असली धातु दिखने लगी।
क्या कहा सीएमओ ने ?
इस संबंध में कटघोरा नगर पालिका के सीएमओ मुद्रिका प्रसाद तिवारी ने टीआरपी न्यूज़ से कहा कि ठेकेदार ने जो टेस्ट रिपोर्ट दी उसी के आधार पर मूर्ति लगाने की अनुमति दी गई। हालांकि पेण्ट उखड़ने के बाद ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर से जांच टीम आयी थी, उसकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। तिवारी ने खुद को पाक साफ बताया।

जांच में क्या निकला
बिलासपुर संचालनालय के कार्यपालन अभियंता अली बख्श अपनी टीम के साथ कटघोरा पहुंचे। जांच के बाद उन्होंने बताया कि मूर्ति मानक के अनुरूप नहीं है।
अफसर अली बख्श ने टीआरपी न्यूज को बताया कि कायदे से इसमें कांस्य/ब्रॉन्ज होना चाहिए था, लेकिन जांच में स्टील के साथ पीतल नजर आ रहा है। ठेकेदार द्वारा दी गई टेस्ट रिपोर्ट भी मानक के अनुरूप नहीं पाई गई। अली बख्श ने रिपोर्ट नगरीय निकाय डायरेक्टर आर. एक्का को भेज दी है।

राजनीतिक कनेक्शन के लगे आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पेटी कॉन्ट्रैक्टर भाजयुमो पदाधिकारी होने के साथ कटघोरा विधायक के करीबी माने जाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं थी।
प्रदेश भर में 46 करोड़ की योजना
यह योजना राज्य के 187 नगरीय निकायों में लागू हुई। इसमें 14 नगर निगम, 50 नगर पालिका और 123 नगर पंचायत शामिल हैं। शासन ने इसके लिए 46 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि दी थी।

अटल परिसर के लिए नगर निगमों को 50 लाख, नगर पालिकाओं को 30 लाख और नगर पंचायतों को 20 लाख रुपये मिले थे। सभी जगह एक ही डिजाइन की मूर्ति लगनी थी और सप्लाई भी एक ही जगह से होने की बात सामने आ रही है।
अटल परिसर की नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन:

FAQ: कटघोरा अटल परिसर मूर्ति विवाद
सवाल 1: आरोप क्या हैं ?
कटघोरा अटल परिसर में ब्रॉन्ज की मूर्ति के बजाय सस्ती धातु की मूर्ति लगाकर उस पर ब्रॉन्ज रंग का पेंट करने का आरोप है।
सवाल 2: मूर्ति की तय लागत कितनी थी
प्रतिमा की अनुमानित लागत 13-14 लाख रुपये थी। ठेकेदार ने 10 लाख में लगाने का रेट दिया था।
सवाल 3: जांच में क्या पाया गया
जांच अधिकारी के अनुसार मूर्ति में कांस्य नहीं, स्टील और पीतल है। टेस्ट रिपोर्ट भी सही नहीं है।
सवाल 4: किसने की जांच
बिलासपुर से आए कार्यपालन अभियंता अली बख्श ने टीम के साथ जांच कर रिपोर्ट डायरेक्टर को सौंपी है।
सवाल 5: अब क्या मांग हो रही है
स्थानीय नागरिक पूरे प्रदेश की 187 अटल प्रतिमाओं की जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


