Sawan Somwar 2026: सनातन संस्कृति में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस वर्ष सावन के पहले सोमवार पर छत्तीसगढ़ के तमाम शिवालयों में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है।
राजधानी रायपुर से लेकर बस्तर, सरगुजा, गरियाबंद और बिलासपुर तक के प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से पूरा प्रदेश शिवमय हो गया है। श्रद्धालु विधि-विधान से जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना कर रहे हैं।
सावन सोमवार का धार्मिक महत्व और परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के महीने में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। तभी से यह माना जाता है कि सावन मास में जो भी भक्त सच्चे मन से शिव-पार्वती की पूजा करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
सोमवार का दिन विशेष रूप से देवों के देव महादेव को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र व धतूरा अर्पित करने से कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन की तमाम बाधाएं दूर होती हैं। छत्तीसगढ़ में इस पावन अवसर पर कांवड़ यात्रा निकालने और हसदेव समेत विभिन्न पवित्र नदियों के जल से भगवान शिव का अभिषेक करने की गहरी परंपरा है।
रायपुर के हटकेश्वरनाथ और बूढ़ेश्वर मंदिर में विशेष अनुष्ठान
राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक महादेव घाट स्थित हटकेश्वरनाथ मंदिर में सावन के पहले सोमवार पर विशेष पूजा रात 2 बजे से ही शुरू हो गई थी। यहां शिवलिंग का गणेश स्वरूप में बहुत ही आकर्षक श्रृंगार किया गया है, जिसके दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं। मान्यता है कि इस प्राचीन मंदिर (जिसे कलचुरी वंश के राजाओं ने बनवाया था) में नंदी के कान में मनोकामना कहने से शिवजी उसे अवश्य पूरा करते हैं। वहीं, बूढ़ा तालाब स्थित बूढ़ेश्वर महादेव मंदिर के पट सुबह 3:30 बजे खोले गए और सुबह 6 बजे भव्य महाआरती संपन्न हुई।
गरियाबंद के भूतेश्वरनाथ और संभागों के अन्य मंदिर
गरियाबंद के प्रसिद्ध प्राकृतिक भूतेश्वरनाथ महादेव मंदिर में भी सुबह से ही कांवड़ियों और श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। यहां जगह-जगह भंडारों का आयोजन कर कांवड़ियों को भोजन और फल वितरित किए जा रहे हैं। इसके अलावा सरगुजा के ऐतिहासिक देवगढ़ में अर्धनारीश्वर शिव की पूजा के लिए और 10वीं शताब्दी के महेशपुर शिव मंदिर में हजारों भक्तों ने जलाभिषेक किया। बिलासपुर, मनेन्द्रगढ़ (हसदेव नदी के तट पर स्थित मंदिर), रायगढ़ के कोसमनारा बाबाधाम और दंतेवाड़ा के प्रसिद्ध मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर में भी शिव भक्तों की भारी भीड़ जुटी है।
सावन सोमवार व्रत का महत्व
यह व्रत शारीरिक और मानसिक शुद्धि के साथ-साथ भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का साधन है। इस दिन व्रत रखने से अहंकार, क्रोध और नकारात्मकता समाप्त होती है तथा मन में शांति का वास होता है।
शुभ समय और पूजा का मुहूर्त
सावन सोमवार के दिन प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना सबसे उत्तम माना जाता है। सूर्योदय के समय या दिनभर के किसी भी प्रहर में अपनी सुविधा के अनुसार शिव पूजा की जा सकती है। प्रदोष काल (शाम का समय) में महादेव की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
सरल पूजा विधि
- स्नान और संकल्प: सुबह स्नान कर साफ वस्त्र (विशेषकर सफेद या पीले) धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग अभिषेक: मंदिर या घर पर शिवलिंग का जल, गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
- शृंगार और सामग्री अर्पण: शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाएं। इसके बाद बेलपत्र, आंकड़े के फूल, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते और भस्म अर्पित करें।
- मंत्र जाप और आरती: ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में कपूर जलाकर आरती करें।


