Dogs Sterilization Municipal Corporation Raipur
दो डॉक्टर के भरोसे राजधानी के 40 हजार डॉग्स, डेढ़ साल में हुआ मात्र सात हजार 563 कुत्तों का बधियाकरण

दामिनी बंजारे 

रायपुर। राजधानी में आवारा कुत्तों का आतंक दिनों-दिन बढ़ने लगा है। प्रदेश के अस्पतालों रोजाना दर्जनों केस डॉग बाइट के आ रहे हैं। जबकि नगर निगम की ओर से शहर में अवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने बधियाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। नगर-निगम को सरकार का सीधा आदेश है की गली में घूमने वाले डॉग्स का बधियाकरण करे। वहीं नगर निगम रायपुर भी दावा करता है की उनके द्वारा रोजाना 12-13 स्ट्रीट डॉग्स का स्टरलाइजेशन (बधियाकरण) किया जा रहा है। वहीं अब तक नगर निगम के सर्वे के मुताबिक शहर में करीब 30 से 40 हजार की संख्या में आवारा कुत्ते हैं।

निगम से जब इस विषय पर बात की तो उन्होंने फरवरी 2020 से जुलाई 2021 तक का डाटा देते हुए कहा कि हमने पिछले डेढ़ वर्षों में सात हजार से अधिक डॉग्स का बधियाकरण किया है। अब बात यह आती है की जब निगम अपना यह आंकड़ा पेश कर रहा है तो स्टरलाइजेशन होने वाले डॉग्स शहर में दिख क्यों नहीं रहे। क्या यह बधियाकरण प्रोसेस केवल फ़ाइल में ही उजागर है या फिर ये योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है।

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मात्र दो पशु चिकित्सक के भरोसे बधियाकरण

राजधानी रायपुर की बात करें तो एक जोन में करीब 2 से 3 हजार डॉग्स दर्ज किए गए हैं और राजधानी भर में 40 से 50 हजार डॉग्स की तादाद हैं मगर इनका बधियाकरण करने वाले पशु चिकित्सक केवल दो ही है। बैजनाथपारा स्थित पशु चिकित्सा अस्पताल में पशु चिकित्सक डॉ. एसके दीवान, डॉ. पवन शाहनी सेवाएं दे रहे हैं। बधियाकरण इनके ही जिम्मे है। कुत्तों को पकड़ने के लिए एक नॉन-प्रोफेशनल युवक को ट्रेंड किया गया है, जो अपने साथ दो लड़कों को प्रशिक्षण दे रहा है। इन्हें निदान 1100 से कुत्तों से संबंधित परेशानियों की सूचना मिलती है।

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सुविधाओं की कमी

चिकित्सकों से डॉग्स पकडने व बधियाकरण के लिए लाए जाने वाले आवारा कुत्तों पर बात की गई तो उनका कहना है कि राजधानी में केवल चार प्रशिक्षित लड़के काम कर रहे हैं। हमारे यहाँ के वर्कर्स जब कुत्तों को पकड़ने जाते हैं उस वक़्त उनके पास सुविधाओं की कमी है। न तो डॉग्स बाईट से बचाव के लिए किट है और न ही जैकेट जिसकी वजह से कभी-कभी कुत्ते इन्हें ही काट देते है। इस तरह की घटना कई बार हो चुकी है, जिसके बाद उन्हें मेकाहारा अस्पातल में भर्ती करना पड़ा।

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बात यह आती है की बिना सुविधाओं के वे युवक डॉग बाईट का शिकार होंगे। क्योंकि वे मौके पर पहुंचते हैं, कुत्तों को पकड़कर अस्पताल ले जाते हैं वह भी बिना किट के और उसके बाद कुत्तों की नसबंदी की जाती है। फीमेल के यूट्रस को निकाला जाता है। निर्धारित समय तक अस्पताल में रखने के बाद इन्हें उसी स्थान पर छोड़ दिया जाता है, जहां से पकड़ा गया है। हालांकि डॉक्टर्स का दावा है कि कुत्तों की संख्या में कमी आई है।

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अधर में लटकी ओटी व्यवस्था

डॉग्स का बधियाकरण करने के लिए पशु स्वास्थ्य विभाग द्वारा मोड्यूलर ओटी पशु चिकित्सा अस्पताल का प्लान भी पिछले दो सालों से लटका हुआ है। न तो अभी व्यवस्थित रूप से चिकित्सालय तैयार हो पाया है और न ही पर्याप्त डॉक्टर हैं जो डॉग्स का बधियाकरण कर पाएं। जबकि सिर्फ कुत्तों के बधियाकरण के लिए अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर (ओटी) बनाया जा रहा है, जो मानकों पर है। एक साथ 25 से अधिक कुत्तों को रखने के लिए ब्लॉक भी बनाए जा रहे हैं। इसी इमारत में डॉक्टर्स रूम, दवा स्टोर रूम भी बनाया जा रहा है। मगर विगत दो वर्षों से इस कार्य में कोई भी गति नहीं हुई है।

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डॉग बाईट के बढ़ रहे मामले

पूर्ण तरीके से बधियाकरण न होने से प्रतिवर्ष करीब दस से पंद्रह हजार कुत्तों की संख्या में बढ़ोतरी होती है। जब संख्या बढ़ेगी तो जाहिर सी बात है की कुत्तों के काटने के केस बढ़ेंगे। रायपुर में हर महीने करीब 1500 डॉग बाईट के मामले दर्ज किए गए हैं और पिछले डेढ़ सालों की बात करें तो करीब 30 हजार लोगों को डॉग्स ने अपना शिकार बनाया है। मगर न तो इसके बावजूद निगम मुस्तेद हुआ और न ही पशु स्वास्थ्य विभाग।

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यहां रहता है डॉग्स का जमावड़ा

कुकुरबेडा, आमानाका, भाटागांव, चंगोराभाठा, सरस्वती नगर, कोटा, भारतमाता चौक, मोवा, फाफाडीह, डब्ल्यूआरएस कॉलोनी, शिवानंद नगर, प्रोफेसर कॉलोनी, हीरापुर, टाटीबंध, गुढ़ियारी आदि

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जानकारी देने में आनाकानी कर रहे निगम अधिकारी

इस संदर्भ में जब निगम अधिकारी से बात की गई तो वे जवाब देने में आनाकानी कर रहे हैं। जबकि टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है मगर इसके वाबजूद भी अधिकारी इस बात को छुपा रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रतिदिन निगम द्वारा 10 से 12 कुत्तो का बधियाकरण किया जा रहा है। साथ ही हर माह 400 से 450 तक की संख्या निर्धारित की गई हैं वही जनवरी 2018 से दिसम्बर 2019 तक रेखा देवांगन को 184 रूपये में टेंडर दिया गया था वहीं फरवरी 2020 से वर्तमान स्थिति में डोम लाल डहरिया को ये टेंडर 199 रूपये में दिया गया है। डॉग के बधियाकरण करने से लेकर दो दिनों तक उसे रखना और फिर उसे जिस जगह से लाया गया है वहाँ वापस छोड़ने तक का खर्चा शामिल होता है। दवाई और बाकि चीजों की व्यवस्था नगर निगम द्वारा की जाती है।

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