चित्रकूट। सोशल मीडिया (SOCIAL MEDIA) को लेकर समाज में तरह-तरह की सोच निकलकर सामने आती रही हैं। कोई इसे भावी पीढ़ी के लिए खतरा मानता है तो कोई इसे टेक्नोलॉजी (Technology) की नजर से बेहतर समझता है। अगर सोशल मीडिया (SOCIAL MEDIA) को नए समाज में खतरा कहा जाता है तो ये किसी को नया जीवन भी दे सकता है। इस बात को प्रमाणित कर रही है अपने परिवार से बिछड़े डालचंद्र की दास्तां, जो किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं है।

सोशल मीडिया के जरिये पिता-पुत्र का मिलन

तीस साल से बिछड़े पिता-पुत्र का आज सोशल मीडिया (SOCIAL MEDIA) की बदौलत मिलन हो गया। चार साल का वो बेटा आज जवां हो चुका था और पिता का चेहरा उसे शायद ही याद हो। लेकिन, सामने आने पर दोनों के दिल धड़क उठे और मिलते ही बंद जुबां के बीच सिर्फ आसुओं की धारा बहती रही। कभी राम-भरत मिलाप की साक्षी चित्रकूट की धरती आज इन बिछड़े पिता-पुत्र के मिलन की गवाह बन गई।

सोशल मीडिया में डला पोस्ट वायरल होकर बेटे के पास पहुंचा

बुलंदशहर के खुर्जा थानांतर्गत मूंडाखेड़ा निवासी डालचंद्र प्रजापति करीब 30 साल पहले पत्नी के निधन के बाद भटककर चित्रकूट आ गए थे, तब उनका बड़ा बेटा राकेश 26 साल का था और छोटा पवन उर्फ कल्लू महज चार साल का। तब से वह यहां मंदिरों में ठिकाना बदलते हुए 80 वर्ष की आयु में पहुंच गए।

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उम्र के आखिरी पड़ाव में अंग शिथिल होने पर पिछले कुछ दिनों से डालचंद्र ने रामघाट पर डेरा डाल रखा था। इसी बीच एक सप्ताह पहले बारिश में भीग रहे बुजुर्ग पर समाजसेवियों की निगाह पड़ी तो उनकी जिंदगी बदल गई। सोशल मीडिया पर बुजुर्ग डालचंद्र का पोस्ट डाला गया, इसके बाद उनका वीडियो वायरल हुआ जो उनके छोटे बेटे तक पहुंच गया।

चार साल का छोटा बेटा पवन आज 34 साल का जवान हो गया था। डालचंद्र को कतई उम्मीद नहीं थी कि उनका बेटा कभी उन्हें पहचान पाएगा और उसे पिता का चेहरा भी याद होगा। मंगलवार सुबह पवन सोशल मीडिया पर मिली जानकारी के आधार पर चचेरे भाई अशोक के साथ उनसे मिलने पहुंचा। इसके बाद पिता-पुत्र की मुलाकात रैन बसेरा सीतापुर में हुई। डालचंद्र के साथ बंद जुबां के बीच पवन और अशोक तीनों काफी देर तक एक दूसरे को देखकर आंसू बहाते रहे। उन्हें देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।

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परिजनों ने कराई पहचान

पवन ने बताया कि पिता का चेहरा उसे ठीक ढंग से याद नहीं था। बड़े भाई राकेश व बहन जयवती ने परवरिश की। पिता के लापता होने पर भइया राकेश उन्हें काफी ढूंढते रहे थे। काफी तलाश करने के बाद उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी। इस बीच गुड़ बनाते समय कढ़ाही में गिरने से भइया की मौत हो गई। उसे कतई उम्मीद नहीं थी पिता से उसका मिलन हो पायेगा। पवन ने बताया कि वह दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम करता है, जहां पर उसने वायरल वीडियो देखा और परिजनों से वीडियो में दिखने वाले बुजुर्ग़ की पहचान कराई। इसके बाद वह चचेरे भाई के साथ पिता को साथ लेने आया है।

श्रीराम की भक्ति ने मिलाया परिवार

धर्म नगरी चित्रकूट की धरती राम-भरत मिलाप की साक्षी है और आज फिर एक बिछड़े पिता-पुत्र का मिलन करा दिया। डालचंद्र की दास्तां सुनने वाले हर किसी की जुबां पर यही रहा कि श्रीराम की भक्ति से ही उसे परिवार का मिलन नसीब हुआ। तीस साल से चित्रकूट में रहकर डालचंद्र के पास सिर्फ श्रीराम की भक्ति के अलावा कोई सहारा नहीं था। डालचंद्र भी मंदिरों के आश्रय स्थल में रहते हुए अपना जीवन काट रहे थे।

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इन्होने किया डालचंद्र का वीडियो और फोटो वायरल

पिछले सप्ताह चित्रकूट के रामघाट पर डालचंद्र सीढिय़ों के पास बारिश से भीगे कंबल में ठिठुर रहे थे। समाजसेवी आनंद ङ्क्षसह पटेल ने उन्हें देखा और उन्होंने बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत ङ्क्षसह व सीतापुर चौकी इंचार्ज रामवीर ङ्क्षसह को जानकारी दी। अजीत ने डालचंद्र से बातचीत करके वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। उसमें डालचंद्र ने बिछड़ते समय बेटों की कम उम्र के कारण उनके पहचान पाने को लेकर उम्मीद कम जताई थी। उन्हें क्या पता था कि वही बेटा अब बड़ा हो चुका है। आनंद ङ्क्षसह और अजीत ङ्क्षसह ने डालचंद्र की छह दिन तक सेवा की और रहने को सुरक्षित स्थान दिया।

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रंजना वर्मा पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया से जुड़ी अनुभवी न्यूज राइटर हैं। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। रायपुर के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश से जुड़े समसामयिक मुद्दों के साथ राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लेखन किया है। समाचार लेखन के साथ SEO आधारित कंटेंट तैयार करने में भी उनकी अच्छी पकड़ है। सरल भाषा में तथ्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना और पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है।