मुंबई। हत्या जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देकर धर्म के आधार पर देश को अशांत करने की लगातार कोशिशें की जा रही है। बीते सप्ताह अमरावती के एक व्यवसायी उमेश कोल्हे की हत्या मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी  एनआईए ने बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी का कहना है कि यह वारदात कुछ लोगों के समूह की एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी।

इसका मकसद देश के एक विशेष समुदाय के बीच दहशत फैलाना था। साथ ही यह धर्म के आधार पर दुश्मनी को बढ़ावा देने का प्रयास भी था।  कोल्हे की हत्या मामले में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, भारत के लोगों को एक समुदाय को आतंकित करने के लिए साजिश रची गई। इस मामले का कनेक्शन नेशनल और इंटरनेशनल भी हो सकता है।


फेसबुक पर भारतीय जनता पार्टी की पूर्व नेता नुपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट लिखने को लेकर कोल्हे की 21 जून की रात को हत्या कर दी गई थी। एनआईए ने 2 जुलाई को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 16, 18 और 20 के तहत मामला दर्ज किया।

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गिरफ्तार आरोपी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल
एनआईए ने अदालत में कहा कि कोल्हे की हत्या के आरोप में गिरफ्तार आरोपी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे। एनआईए की विशेष अदालत ने दलीलें सुनने के बाद सात आरोपियों को 15 जुलाई तक इस केंद्रीय जांच एजेंसी की हिरासत में भेज दिया। एजेंसी ने विशेष न्यायाधीश ए के लाहोटी से आरोपियों को 15 दिन की हिरासत का अनुरोध किया था, लेकिन उन्होंने 15 जुलाई तक एजेंसी को आरोपियों की हिरासत दी।


एनआईए ने अदालत को बताया कि यह दर्शाने के लिए आधार है कि आरोपी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे। एजेंसी ने कहा कि आरोपियों की कोल्हे से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी, लेकिन उनका इरादा लोगों को आतंकित करना था। एनआईए ने कहा कि ऐसा ही अपराध कहीं और भी हुआ है। एजेंसी शर्मा का समर्थन करने पर उदयपुर में एक दर्जी की हत्या का हवाला दे रही थी। उसने अदालत को बताया कि यह गहरी साजिश है।

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