टीआरपी। the government is providing free travel: कुछ वर्ष पहले तक बुजुर्ग तीर्थयात्रा पर जाने के लिए तरस जाते थे। क्योंकि, बुजुर्गों को ले जाने के लिए उनकी संतानों के पास समय नहीं रहता था। तीर्थयात्रा पर बुजुर्गों की देखभाल करना, भ्रमण कराना बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती थी। सक्षम लोग ही बुजुर्गों को तीर्थयात्रा पर ले जा सकते थे। पिछले कुछ वर्षों से शुरू की गई मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा योजना से बुजुर्गों के चेहरे पर मुस्कान छाई है। अब, यात्रा पर जाने के लिए बुजुर्गों को अपने बच्चों पर निर्भर नहीं होना पड़ रहा है। यात्रा पर आने जाने का खर्च, यात्रा स्थल पर ठहरने, भ्रमण करने, नाश्ता, भोजन, यहां तक कि बीमार होने पर डाक्टर की सुविधा, दवाई खर्च भी नहीं करना पड़ रहा है। यह योजना बुजुर्गों के लिए खुशी का पैगाम लेकर आई है।
तीर्थयात्रा कर लौटे श्रद्धालुओं का स्वागत
तीर्थयात्रा योजना के तहत रायगढ़ जिले से 1200 से अधिक श्रद्धालओं ने श्रीराम लला का दर्शन किया। दर्शन करके लौटने के पश्चात रायगढ़ के नगर निगम ऑडिटोरियम में बुजुर्ग यात्रियों का सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने भगवान श्रीराम के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। रामायण आरती के साथ वातावरण राममय हो उठा। श्रद्धालुओं को स्मृति स्वरूप रामचरितमानस की पुस्तक, शाल, श्रीफल और यात्रा के फोटोग्राफ भेंट किए गए। इस अवसर पर नगर निगम रायगढ़ महापौर जीवर्धन चौहान, जिला पंचायत उपाध्यक्ष दीपक सिदार, नगर निगम सभापति डिग्रीलाल साहू, जिला पंचायत सदस्य सुषमा खलखो, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, जिला पंचायत सीईओ जितेंद्र यादव आदि उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ की माटी का भगवान श्रीराम से गहरा नाता
वित मंत्री चौधरी ने श्रद्धालुओं का चरणस्पर्श कर आशीर्वाद लिया और कहा कि यह योजना वास्तव में बुजुर्गों के सपनों को साकार करने वाली योजना है। छत्तीसगढ़ की माटी का भगवान श्रीराम से गहरा नाता है। माता कौशल्या छत्तीसगढ़ की बेटी थीं, इसलिए भगवान श्रीराम को हम भांजा मानते हैं। त्रेतायुग में 14 वर्षों का वनवास समाप्त हुआ था, लेकिन कलियुग में राममंदिर निर्माण के लिए 500 वर्षों का संघर्ष करना पड़ा।
’यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाएं’
जिला पंचायत सीईओ जितेंद्र यादव ने बताया कि तीर्थयात्रियों के लिए आवास, भोजन, परिवहन और चिकित्सा की संपूर्ण व्यवस्था निःशुल्क की जाती है। प्रत्येक यात्री को विशेष पहचान पत्र भी प्रदान किया गया।
’श्रद्धालुओं ने साझा किए अनुभव’
जिले के विभिन्न विकासखण्डों से अब तक 1206 श्रद्धालु (745 पुरुष एवं 461 महिलाएं) अयोध्या, काशी और अन्य तीर्थों का दर्शन कर चुके हैं। सम्मेलन में श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया।
काशी और अयोध्या के दर्शन सबसे सुखद क्षण
पुसौर निवासी खगेश्वर पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास से ही यह संभव हुआ। राजकुमारी साव ने यात्रा को सहज और सुखद बताते हुए कहा कि पूरी यात्रा परिवार जैसे वातावरण में पूरी हुई। उमेश सिंह सिदार ने कहा कि सरकार वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान हेतु लगातार कार्य कर रही है। वहीं सावित्री भगत ने कहा कि अयोध्या दर्शन उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। सुनील थवाईत ने बताया कि यात्रा में स्वच्छ भोजन, सुरक्षा और स्वागत की उत्कृष्ट व्यवस्था रही। काशी और अयोध्या के दर्शन उनके जीवन के सबसे सुखद क्षण रहे।



