टीआरपी डेस्क। दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को एक महिला ग्राहक को 1.7 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। जांच में पाया गया कि बैंक ने खाते में पर्याप्त बैलेंस होने के बावजूद गलत तरीके से ईसीएस बाउंस चार्ज वसूले थे।

क्या है मामला

महिला ने एचडीएफसी बैंक से कार लोन लिया था और ईएमआई कटने के लिए अपने एसबीआई खाते से ऑटो-डेबिट की अनुमति दी थी। इसके बावजूद उनकी 11 ईएमआई बाउंस दिखाईं गईं, और हर बार एसबीआई ने 400 रुपये का जुर्माना लगाया। महिला ने जब बैंक स्टेटमेंट दिखाया तो साफ हुआ कि हर बार खाते में पर्याप्त रकम मौजूद थी।

बैंक ने नहीं मानी गलती

महिला की आपत्तियों के बावजूद एसबीआई ने चार्ज वापस करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने 2010 में जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज की, जो खारिज कर दी गई। फिर उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (NCDRC) में अपील की, जहां से मामला दोबारा दिल्ली राज्य आयोग को भेजा गया। आखिरकार 9 अक्टूबर 2025 को महिला के पक्ष में फैसला आया।

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बैंक की दलील और आयोग का जवाब

एसबीआई का कहना था कि ईसीएस मैंडेट में दी गई जानकारी गलत थी, इसलिए ट्रांजैक्शन अस्वीकार हुए। लेकिन महिला ने तर्क दिया कि अगर जानकारी गलत होती, तो बाकी ईएमआई कैसे सफलतापूर्वक प्रोसेस हुईं? आयोग ने महिला की दलील को सही माना और कहा कि बैंक का बचाव अस्थिर और गलत है।

आयोग ने टिप्पणी की कि महिला ने 2008 में लोन लिया था और 2010 से शिकायत के लिए लगातार लड़ाई लड़ रही है। इतने सालों की कानूनी परेशानी को देखते हुए, आयोग ने बैंक को मुआवजे सहित रकम लौटाने का निर्देश दिया।