नई दिल्ली। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के बीच उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप का दिल्ली के सरकारी स्कूलों में भ्रमण का कार्यक्रम चर्चा में केंद्र बना हुआ है। इसमें मेलानिया ट्रंप विशेष रूप से ‘हैप्पीनेस’ कक्षाओं में शामिल होने वाली हैं। ऐसा नहीं है कि विश्वभर में ‘हैप्पीनेस’ स्कूल पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं हो।

कई देशों में पूर्व से ही यह पाठ्यक्रम का हिस्सा रहा है, लेकिन इन देशों के बीच दिल्ली सरकार का ‘हैप्पीनेस’ मॉडल अपनी विशेषता को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसके तहत प्रतिदिन आठ लाख बच्चों के लिए स्कूलों में ‘हैप्पीनेस’ की कक्षाएं लगती हैं। दिल्ली सरकार का दावा है कि इतने बड़े स्तर पर पूरी दुनिया में कहीं ‘हैप्पीनेस’ पाठ्यक्रम की कक्षाएं नहीं चल रही हैं। इसके तहत कई राष्ट्रों में यह पाठ्यक्रम सोशल-इमोशनल लर्निंग के नाम से प्रचलित हैं, लेकिन अन्य राष्ट्रों में यह पाठ्यक्रम सीमित है। यह उन्हीं बच्चों को पढ़ाया जाता है, जो तनाव में हों या किसी परेशानी का सामना कर रहे हैं।

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दलाईलामा ने किया था उद्घाटन

दिल्ली सरकार ने वर्ष 2018 से सरकारी स्कूलों में इस पाठ्यक्रम को शुरू करने की घोषणा की थी। उस दौरान दिल्ली सरकार की तरफ से आयोजित एक कार्यक्रम में बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने इस पाठ्यक्रम का उद्घाटन किया था। तब से अभी तक सरकारी स्कूलों में प्रतिदिन कक्षाओं की शुरुआत ही ‘हैप्पीनेस’ की कक्षाओं से होती है। इस पाठ्यक्रम को शुरू करने के पीछे के उद्देश्य को लेकर शैलेंद्र शर्मा बताते हैं कि ‘हैप्पीनेस’ इंडेक्स में भारत की स्थिति को देखते हुए उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने यह फैसला लिया था।

अभिभावकों व शिक्षकों को भी हुआ लाभ

सरकारी स्कूलों में शुरू हुए ‘हैप्पीनेस’ पाठ्यक्रम का फायदा जितना बच्चों को हुआ है, उतना ही लाभांवित इससे अभिभावक व शिक्षक भी हुए हैं। इसको लेकर अभिभावकों का कहना है कि इस पाठ्यक्रम के बाद बच्चों में चंचलता की कमी आने के साथ ही एक ठहराव आया है, तो वहीं बच्चों में कृतज्ञता का भाव विकसित हुआ है। इससे बच्चे घर में मदद के लिए आगे आए हैं, वहीं शिक्षकों का कहना है कि पाठ्यक्रम लागू होने के बाद उनमें भी बच्चों को समझने का नजरिया अधिक विकसित हुआ है।

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12 राज्य आ चुके हैं मॉडल देखने

दिल्ली सरकार के इस ‘हैप्पीनेस’ मॉडल को लेकर देशभर में ज्ञिज्ञासा है। इसके तहत अभी तक कई राज्य इस मॉडल को देखने के लिए दिल्ली के सरकारी स्कूलों का भ्रमण कर चुके हैं। इस संबंध में निदेशालय के प्रधान सलाहकार शैलेंद्र शर्मा ने बताया कि इन दो सालों में 12 से अधिक राज्यों के प्रतिनिधियों ने स्कूलों का भ्रमण किया है, जिसमें उत्तराखंड, तेलांगना, झारखंड, आंध्रा प्रदेश जैसे राज्य प्रमुख हैं।

क्या है पाठ्यक्रम में

‘हैप्पीनेस’ पाठ्यक्रम की पाठ्यसामग्री को लेकर शैलेंद्र शर्मा बताते हैं कि इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में विवेक विकसित करना, उनके दिलो-दिमाग को वर्तमान पर केंद्रित करना, सकारात्मक बनाना और उन्हें कृतज्ञता का भाव विकसित करना है। इसके लिए इस पूरे पाठ्यक्रम को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है। इसमें माइंडफुलनेस, कहानी और गतिविधियां शामिल हैं।

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