रायपुर/बालोद। शासकीय प्राथमिक एवं मिडिल स्कूलों में कार्यरत मध्याह्न भोजन रसोइयों की हड़ताल का प्रत्यक्ष प्रभाव प्रदेश भर के हजारों स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। 29 दिसंबर 2025 से रायपुर में चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण जिलों के अधिकांश स्कूलों में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत मिलने वाला मध्यान्ह भोजन पूरी तरह ठप हो गया है।
पिछले 40 दिनों से बच्चे इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर हो गई है। बालोद जिले की बात करें तो यहां कुल 1,272 प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल संचालित हैं, जिनमें 74,764 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन स्कूलों में 2,636 रसोइयां कार्यरत हैं, जो हड़ताल पर होने के कारण अधिकांश स्थानों पर चूल्हा नहीं जल रहा है। इस स्थिति में बच्चे या तो घर से टिफिन लाने को मजबूर हैं या फिर भोजन के लिए स्कूल से घर जा रहे हैं।कई मामलों में बच्चों को भूखे पेट ही कक्षाओं में बैठना पड़ रहा है।
वैकल्पिक व्यवस्था का दावा मगर धरातल पर फेल
बालोद ब्लाक के कुछ स्कूलों की पड़ताल के दौरान सामने आया कि 29 दिसंबर से अब तक कई स्कूलों में एक दिन भी मध्यान्ह भोजन नहीं बना है। जिला शिक्षा विभाग को हड़ताल की जानकारी होने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं है कि किन-किन स्कूलों में भोजन बन रहा है और किनमें नहीं। विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ये दावे खोखले साबित हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिला मुख्यालय, जहां जिला शिक्षा अधिकारी और बीईओ कार्यालय स्थित हैं, वहां के स्कूलों में भी मध्यान्ह भोजन नहीं परोसा जा रहा।
बालोद ब्लॉक के ग्राम जुंगेरा स्थित प्राथमिक शाला की प्रधान पाठक पद्मिनी उर्वशा ने बताया कि उनके स्कूल में 68 बच्चे अध्ययनरत हैं, 29 दिसंबर से रसोईया हड़ताल पर है। इस कारण शाला में बच्चों को मध्यान भोजन नहीं परोसा जा रहा है। बच्चों को हिदायत दी गई है कि वे भोजन घर से लेकर आएं ताकि कोई भी बच्चा भूखा न रहे, विभाग की तरफ से वैकल्पिक व्यवस्था का कोई दिशा निर्देश नहीं दिया गया है।
इसी तरह ग्राम तरौद स्थित प्राथमिक शाला के प्रधानपाठक कन्हैयालाल देवांगन ने बताया कि स्कूल में भोजन बनाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने किसी प्रकार के निर्देश नहीं दिए गए हैं।
समूह की महिलाएं भी नहीं बना रहीं भोजन
सरकार ने मध्यान्ह भोजन के इंतजाम की जिम्मेदारी महिला समूहों को दे रखी है, वहीं भोजन बनाने का काम रसोइए कर रहे हैं, जो पिछले 40 दिनों से हड़ताल पर हैं। प्रधान पाठकों का कहना है कि समूह की महिलाओं को कार्यालय से समय पर पारिश्रमिक राशि नहीं मिल पाती है, जिससे वे मध्यान्ह भोजन नहीं बना रही हैं। बच्चे टिफिन लेकर आते हैं, और जो लेकर नहीं आते उन्हें भोजन करने घर जाने के लिए छुट्टी दे दी जाती है।
प्रधानपाठकों का कहना है कि उन्हें किसी भी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था के स्पष्ट निर्देश नहीं मिले हैं।
मांग पूरी नहीं होने तक हड़ताल
बालोद के रसोइया संघ के जिलाध्यक्ष प्रमोद यादव ने बताया कि रसोइया संघ अपनी जायज मांगों- कलेक्टर दर पर वेतन, अंशकालीन को पूर्णकालीन करने और दर्ज संख्या कम होने पर रसोइयों को न हटाने की मांग को लेकर हड़ताल पर है। मांगें पूरी नहीं होने तक हड़ताल जारी रखने की चेतावनी दी गई है। उन्होंने सरकार पर उपेक्षा का आरोप भी लगाया।
बच्चों की उपस्थिति हुई कम
उल्लेखनीय है कि स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी स्थिति में मध्यान्ह भोजन बाधित नहीं होना चाहिए, बावजूद इसके अधिकांश जिलों में योजना पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। इससे सबसे अधिक नुकसान गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों को उठाना पड़ रहा है। इस वजह से स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी कम हो गई है। हालांकि कई जिलों में रसोइयों के हड़ताल में शामिल नहीं होने के कारण वहां मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था अप्रभावित है।



