टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम मेढ़की ने सामाजिक अनुशासन की एक नई मिसाल पेश की है। गांव के सौहार्द को बचाने के लिए ग्रामीणों ने एक ऐतिहासिक सामूहिक बैठक की, जिसमें तय किया गया कि यदि कोई भी ग्रामीण एक-दूसरे की बुराई या ‘चुगली’ कर विवाद पैदा करेगा, तो उसे 5001 रुपये का आर्थिक दंड भुगतना होगा।

ग्रामीण अंचलों में अक्सर छोटी-छोटी बातों को इधर-उधर करने (चुगली) से बड़े विवाद खड़े हो जाते हैं, जिससे न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव का माहौल खराब होता है। मेढ़की गांव का यह कठोर निर्णय अन्य गांवों के लिए एक ‘केस स्टडी’ बन सकता है, जहां सामाजिक दबाव के जरिए नशाखोरी और आपसी कलह को नियंत्रित करने की कोशिश की गई है।

बिगड़ते माहौल को सुधारने की कवायद

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ समय से गांव में आपसी मनमुटाव बढ़ रहा था। कुछ लोग शराब के नशे में दूसरों पर अभद्र टिप्पणी करते थे और बातों को भड़काकर आपसी झगड़ा करवा देते थे। इसी को देखते हुए ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से निम्नलिखित सख्त नियम लागू किए हैं। सार्वजनिक या व्यक्तिगत रूप से इधर की बातें उधर कर झगड़ा करवाने वाले को 5001 रुपये देने होंगे। किसी भी सामाजिक या धार्मिक भोज कार्यक्रम में यदि कोई व्यक्ति शराब पीकर पहुंचता है, तो उसे भी 5001 रुपये के दंड से दंडित किया जाएगा।

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ग्रामीणों का सामूहिक संकल्प

मेढ़की के निवासियों का कहना है कि यह फैसला किसी को प्रताड़ित करने के लिए नहीं, बल्कि गांव में शांति और एकता बनाए रखने के लिए लिया गया है। जुर्माने की राशि का उपयोग गांव के विकास या सार्वजनिक कार्यों में किए जाने की संभावना है। ग्रामीणों का मानना है कि आर्थिक दंड के डर से लोग अमर्यादित आचरण करने से बचेंगे।