हाईकोर्ट भवन के सामने न्याय का हथौड़ा और सरकारी भर्ती परीक्षा रद्द होने की खबर का दृश्यांकन
हाईकोर्ट ने सहायक मत्स्य अधिकारी भर्ती परीक्षा 2025 के परिणाम निरस्त कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के हक में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल पेश की है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मामला (Criminal Case) न्यायालय में विचाराधीन है, तो उसी विषय पर विभाग द्वारा समानांतर जांच (Parallel Inquiry) संचालित नहीं की जा सकती।

यह फैसला हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत भरा है। अक्सर देखा गया है कि पुलिस या अन्य विभागों में एफआईआर दर्ज होते ही विभाग अपनी अलग जांच शुरू कर देता है। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब कर्मचारियों को दोहरी कानूनी प्रक्रिया के दबाव से सुरक्षा मिलेगी।

कांस्टेबल पीके मिश्रा की याचिका पर सुनवाई

यह पूरा मामला बलौदाबाजार सिविल लाइन थाने में पदस्थ कांस्टेबल पीके मिश्रा की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के खिलाफ एक आपराधिक मामला कोर्ट में चल रहा था, लेकिन इसी दौरान विभाग ने उन्हीं तथ्यों के आधार पर विभागीय जांच भी शुरू कर दी थी।

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कांस्टेबल ने अधिवक्ता के माध्यम से तर्क दिया कि:

  • दोनों जांचों का एक साथ चलना न्यायसंगत नहीं है।
  • आपराधिक मामले के तथ्य और विभागीय जांच के बिंदु पूरी तरह समान हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसले भी समानांतर जांच को अनुचित बताते हैं।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी और आदेश

मामले की सुनवाई जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को सही मानते हुए विभागीय जांच की प्रक्रिया पर तत्काल रोक (Stay) लगा दी है।

अदालत का मुख्य आधार

कोर्ट ने माना कि यदि आपराधिक मुकदमे और विभागीय जांच के मुद्दे एक जैसे हों, तो दोनों कार्रवाई साथ नहीं चल सकतीं। विभागीय जांच के निष्कर्षों से आपराधिक मामले की निष्पक्ष सुनवाई प्रभावित होने की गंभीर आशंका रहती है।