टीआरपी डेस्क। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में चलाई गई स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया के चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। इस शुद्धिकरण अभियान के बाद 8 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूची से करीब 3.13 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कदम फर्जी मतदान रोकने और सूची को पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ उन प्रमुख राज्यों में शामिल है जहां की फाइनल मतदाता सूची जारी कर दी गई है। राज्य में आगामी चुनावों से पहले फर्जी वोटरों, दोहरी प्रविष्टियों और मृत मतदाताओं के नाम हटाना बेहद जरूरी था। मतदाता सूची में इस बड़े बदलाव का सीधा असर विधानसभा और लोकसभा क्षेत्रों के चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा, जिससे अब केवल वास्तविक मतदाता ही सरकार चुनने में अपनी भूमिका निभा सकेंगे।
चुनाव आयोग और राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, जब 27 अक्टूबर को SIR प्रक्रिया की घोषणा की गई थी, तब इन चिन्हित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 36 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। हालांकि, गहन जांच और घर-घर सत्यापन के बाद यह संख्या घटकर 32.87 करोड़ रह गई है। यानी शुद्धिकरण के दौरान 3.13 करोड़ वोटरों की कमी दर्ज की गई है।
निर्वाचन आयोग ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, गुजरात और गोवा की फाइनल मतदाता सूची प्रकाशित कर दी है। केंद्र शासित प्रदेशों में पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप का काम भी पूरा हो चुका है। वर्तमान में केवल उत्तर प्रदेश ही ऐसा बड़ा राज्य है जिसकी फाइनल सूची का प्रकाशन अभी शेष है। बिहार में यह प्रक्रिया पहले ही चरण में पूरी कर ली गई थी।
मतदाता सूची में इतने बड़े पैमाने पर नामों की कटौती ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में राजनीतिक पार्टियों ने इस SIR एक्सरसाइज की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में शेड्यूल में बार-बार बदलाव किए गए, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई। हालांकि, आयोग का तर्क है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी और त्रुटिहीन है।
चुनाव आयोग अब तीसरे चरण की तैयारी में जुट गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश सहित बचे हुए राज्यों को कवर किया जाएगा। यदि आपका नाम भी सूची से कटा है, तो आयोग द्वारा दी गई अपील की अवधि के भीतर आप दोबारा पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। राजनीतिक दलों की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट का रुख भी इस प्रक्रिया के भविष्य की दिशा तय करेगा।


