नई दिल्ली। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर आज विराम लग गया है। दरअसल, बतौर राज्यसभा सदस्य उनका कार्यकाल आज यानी 10 अप्रैल को समाप्त हो रहा था। हर किसी को लग रहा था कि अब हरिवंश की उच्च सदन से विदाई तय है, क्योंकि उनकी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने इस बार उन्हें फिर से उम्मीदवार नहीं बनाया था। लेकिन ऐन मौके पर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने उन्हें एक और बड़ा कार्यकाल का तोहफा दे दिया है।

राष्ट्रपति कोटे से मिली एंट्री, जारी हुआ गजट

बता दें कि राष्ट्रपति ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए हरिवंश को राज्यसभा सांसद मनोनीत किया है। गृह मंत्रालय की ओर से इस संबंध में आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। इस मनोनयन के बाद अब यह साफ हो गया है कि अगले छह साल तक उच्च सदन में हरिवंश की आवाज गूंजती रहेगी। हरिवंश का राज्यसभा सदस्य के रूप में यह तीसरा कार्यकाल होगा।

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क्या कहता है संविधान का नियम?

गौरतलब है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह राज्यसभा में 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकें। ये सदस्य साहित्य, कला, विज्ञान और समाज सेवा के क्षेत्र में महारत रखने वाले प्रतिष्ठित व्यक्ति होते हैं। गजट नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया है कि एक नामित सदस्य की सेवानिवृत्ति के कारण हुई रिक्ति को भरने के लिए हरिवंश को यह जिम्मेदारी दी गई है। खास बात यह है कि मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल भी निर्वाचित सांसदों की तरह ही पूरे छह साल का होता है।

विदाई की चर्चाओं के बीच बड़ा दांव

मैदानी सूत्रों और राजनीतिक जानकारों का मानना था कि जेडीयू द्वारा टिकट न दिए जाने के बाद हरिवंश की राहें मुश्किल हो गई थीं। लेकिन राष्ट्रपति द्वारा उनके नाम पर मुहर लगाए जाने से अब वे सदन के सदस्य बने रहेंगे। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे दोबारा उपसभापति की कुर्सी पर भी काबिज होंगे या नहीं।

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