रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के तिल्दा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बेल्दार-सिवनी में हुए बहुचर्चित पेंशन घोटाला मामले में न्यायालय के सख्त रुख और स्पष्ट आदेश के बाद खरोरा थाना पुलिस ने ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक के खिलाफ धोखाधड़ी का आपराधिक मामला (FIR) दर्ज कर लिया है ।

मृत लोगों के नाम पर सरकारी खजाने में सेंध

यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब उमा पुरेना और एक अन्य आवेदक ने रायपुर कोर्ट में धारा 156(3) के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की अर्जी लगाई । लिखित तर्क के मुताबिक, ग्राम पंचायत बेल्दार-सिवनी के सरपंच मुकेश वर्मा, पंचायत सचिव डागेश्वरी वर्मा और रोजगार सहायक मणिशंकर ध्रुव ने अन्य साथियों (दीपक वर्मा और अजय वर्मा) के साथ मिलकर एक राय होकर इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया ।

आवेदिका उमा पुरेना और रमेश कुमार पुरेना ने खरोरा पुलिस द्वारा शिकायत पर कार्रवाई न किए जाने के बाद रायपुर कोर्ट में धारा 156(3) के तहत अर्जी लगाई थी । मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (रायपुर) विवेक कुमार टण्डन की अदालत ने आदेश क्रमांक 02/एफ.आई.आर/2026 जारी किया।

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अदालत ने खरोरा थाना प्रभारी को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि ज्ञापन प्राप्त होते ही तत्काल नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धारा 420 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाए और मामले की जांच कर अंतिम प्रतिवेदन कोर्ट में पेश किया जाए ।

इन तीन पर दर्ज हुआ नामजद मुकदमा

न्यायालय के आदेश के परिपालन में पुलिस ने 1 जून 2026 को अपराध क्रमांक 0256 के तहत मामला दर्ज किया है।

  • मुकेश वर्मा (सरपंच, ग्राम पंचायत बेल्दार-सिवनी)
  • डागेश्वरी वर्मा (पंचायत सचिव)
  • मणिशंकर ध्रुव (रोजगार सहायक)

घोटाले का तरीका बेहद शातिराना था

अदालती दस्तावेजों और एफआईआर के मुताबिक, इन तीनों आरोपियों ने आपस में मिलकर और एक राय होकर शासकीय राशि के गबन का एक बड़ा जाल बुना था। आरोप है कि आरोपियों ने पिछले लगभग 5 वर्षों से गांव के मृत व्यक्तियों के बैंक खातों को छल-पूर्वक और अवैध रूप से चालू रखा । जिन युवतियों व महिलाओं की शादी हो चुकी थी और जो सालों से अपने मायके (गांव) नहीं लौटी थीं, उनके नाम पर आने वाली शासकीय पेंशन राशि को भी बंद नहीं किया । आरोप यह भी है कि फर्जी व कुटरचित (फर्निश्ड) दस्तावेज तैयार कर इस सरकारी पेंशन के पैसे को आरोपियों ने अपने ही निजी बैंक खातों में ट्रांसफर कराया और लगातार इसका अवैध आहरण करते रहे ।

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खरोरा पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठे थे सवाल

गौरतलब है कि इस फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत आवेदकों द्वारा जनवरी और फरवरी 2023 में ही खरोरा थाना और पुलिस अधीक्षक (SP) रायपुर को दी जा चुकी थी । इसके बावजूद पुलिस ने मामला दर्ज करने के बजाय जांच प्रतिवेदन सौंपकर ढीला रवैया अपनाया, जिसे आवेदकों ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन बताया था । अब कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद खरोरा थाना प्रभारी निरीक्षक के. के. कुशवाहा ने खुद शासन की ओर से इस मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू कर दी है ।