बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अवमानना के दो अलग-अलग मामलों में दो IAS अफसरों पर कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने दोनों मामलों की अगली सुनवाई 29 जून से शुरू होने वाले सप्ताह में रखी है और अफसरों को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने को कहा है।

केस 1: दुर्ग कलेक्टर कोर्ट नहीं पहुंचे

हाई कोर्ट ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान दुर्ग कलेक्टर और भू-अर्जन अधिकारी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत द्वारा पूर्व में जारी किए गए नोटिस की तामीली के बावजूद दोनों अधिकारियों की ओर से कोर्ट में किसी ने उपस्थिति दर्ज नहीं कराई।

दरअसल सरस्वती गुप्ता ने दुर्ग कलेक्टर के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने 6 मार्च 2025 को कलेक्टर और भू-अर्जन अधिकारी को नोटिस जारी किया था। नोटिस तामील होने के बावजूद दोनों कोर्ट नहीं पहुंचे। कोर्ट ने मामले को संवेदनशील मानते हुए कोर्ट रूम में मौजूद एडिशनल एडवोकेट जनरल गैरी मुखोपाध्याय को निर्देश दिया कि आज ही दोनों अफसरों को सूचित करें। अगली तारीख पर दोनों को शपथ पत्र के साथ जवाब देना होगा कि आदेश की अवहेलना क्यों की और नोटिस के बाद भी हाजिर क्यों नहीं हुए।

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अवमानना याचिका पर होगी सुनवाई

कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है, एडिशनल एडवोकेट जनरल यह सुनिश्चित करेंगे, अगली सुनवाई की तारीख पर दुर्ग कलेक्टर और भू-अर्जन अधिकारी न केवल व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें, बल्कि इस अवमानना याचिका पर अपना-अपना विस्तृत जवाब, शपथ पत्र के साथ कोर्ट में पेश करें। अवमानना याचिका की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 29 जून 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

केस 2: मुआवजा न देने पर सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम

छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजा न मिलने से जुड़ी एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए नाराजगी जताई है। जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने राज्य सरकार को यह साबित करने के लिए केवल 10 दिनों का अंतिम समय दिया है कि अधिग्रहित जमीन का मुआवजा याचिकाकर्ता के पिता को पहले दिया जा चुका है।

कोर्ट ने यह चेतावनी भी दी है, अगर इस दावे के समर्थन में ठोस दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किए गए, तो न्यायालयीन आदेश की अवहेलना को लेकर आगे की सख्त कानूनी कार्यवाही करेगा

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डॉ. कमल प्रीत सिंह के खिलाफ अवमानना का है केस

दरअसल विश्वनाथ नोनिया ने न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करने के आरोप में अवमानना याचिका दायर की है। इससे पहले हाई कोर्ट ने 7 सितंबर 2023 को याचिकाकर्ता के पक्ष में रिट याचिका पर सुनवाई के बाद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया था, भूमि अधिग्रहण के बदले मुआवजे की राशि का निर्धारण करे और 5 महीने के भीतर याचिकाकर्ता को इसका पूर्ण भुगतान सुनिश्चित करे। तय समय सीमा के बीत जाने के बाद भी जब विश्वनाथ नोनिया को मुआवजे की राशि नहीं मिली, तब उन्होंने तत्कालीन सचिव डॉ. कमल प्रीत सिंह व अन्य के खिलाफ हाई कोर्ट में अवमानना का मामला दर्ज कराया।

रिव्यू पिटिशन हाे चुकी है खारिज

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुशोभित सिंह ने कोर्ट के सामने सरकार के ढुलमुल रवैये को उजागर किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले से बचने के लिए पहले एक पुनर्विचार याचिका दायर की थी। सरकार का तर्क था कि विवादित जमीन का मुआवजा याचिकाकर्ता के पिता को पहले ही दिया जा चुका है। इस दावे को साबित करने के लिए अफसरों ने कोर्ट के रिकॉर्ड पर न तो कोई दस्तावेजी सबूत रखा और न ही कोई पुख्ता तथ्य पेश किए। नतीजतन, हाई कोर्ट ने सरकार की उस पुनर्विचार याचिका को 3 जुलाई 2025 को ही खारिज कर दिया था।

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अब सरकार ने रिट अपील के लिए समय मांगा है। जस्टिस गुरु ने 10 दिन की मोहलत देते हुए कहा कि ठोस दस्तावेजी सबूत पेश करें कि मुआवजा दिया जा चुका है। वरना सख्त कार्रवाई होगी।