बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बीएससी नर्सिंग 2025-26 के प्रवेश मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने प्रवेश के लिए लगाई गई 10वीं परसेंटाइल की न्यूनतम शर्त को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया। साथ ही राज्य को 15 दिन में खाली सीटों के लिए नई काउंसलिंग कराने का निर्देश दिया है।

जानें, क्या था विवाद…

बीएससी नर्सिंग की राज्य में कुल 7,811 सीटें हैं, जिनमें से 4,147 सीटें खाली रह गई थीं। सीटें भरने के लिए राज्य सरकार ने खुद भारतीय नर्सिंग परिषद INC से परसेंटाइल में छूट मांगी थी।

INC ने आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों को देखते हुए न्यूनतम परसेंटाइल की अनिवार्यता में छूट दे दी। इसके बावजूद चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने सभी वर्गों के लिए 10वीं परसेंटाइल की नई शर्त जोड़ दी। इसी को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा..?

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने कहा कि INC द्वारा छूट दिए जाने के बाद राज्य सरकार या आयुक्त को नया पात्रता मानदंड तय करने का अधिकार नहीं है।

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कोर्ट ने नियम 4(4) का हवाला देते हुए कहा कि नर्सिंग प्रवेश में सिर्फ INC के मानक लागू होंगे। राज्य उनमें बदलाव नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट के मां वैष्णो देवी और आशा मामले का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि व्यावसायिक शिक्षा के मानक केंद्र से तय होते हैं, राज्य सिर्फ लागू करेगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि 10वीं परसेंटाइल लगाने के बाद भी 2,000 से अधिक सीटें खाली रहीं। इससे संसाधनों का नुकसान हुआ और पात्र छात्र भी वंचित रह गए।

राज्य सरकार ने अदालत में तर्क दिया कि प्रवेश की अंतिम तिथि निकल चुकी है, इसलिए अब राहत नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने समय पर अदालत का दरवाजा खटखटाया था और देरी न्यायिक प्रक्रिया के कारण हुई। ऐसी स्थिति में छात्रों को नुकसान नहीं उठाना चाहिए। अदालत ने नर्सिंग कॉलेजों को आवश्यक होने पर अतिरिक्त कक्षाएं और क्लीनिकल प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश भी दिए हैं ताकि छात्र निर्धारित पाठ्यक्रम और उपस्थिति की शर्तें पूरी कर सकें।

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ये हैं दिशा निर्देश

1.  नई काउंसलिंग: राज्य सरकार को 15 दिन के भीतर रिक्त सीटों के लिए नई काउंसलिंग का शेड्यूल जारी करना होगा

2.  बिना परसेंटाइल शर्त: प्रवेश INC के 29 दिसंबर 2025 के निर्देशों के अनुसार बिना न्यूनतम परसेंटाइल के होगा

3.  मेरिट के आधार पर: प्रवेश कॉमन एंट्रेंस टेस्ट की इंटर-से मेरिट और अन्य पात्रता पर होगा

4.  अतिरिक्त क्लास: कॉलेजों को छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षा और क्लीनिकल प्रशिक्षण कराना होगा

केवल इस शैक्षणिक सत्र तक सीमित रहेगा फैसला

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश 2025-26 सत्र की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है। इसे भविष्य के प्रवेश सत्रों के लिए नजीर  नहीं माना जाएगा।