Health Tips: दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है और इसे स्वस्थ बनाए रखने के लिए सही आहार और व्यायाम के साथ-साथ पर्याप्त नींद लेना भी बेहद जरूरी है। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) की हालिया रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि नींद की कमी सीधे तौर पर दिल की बीमारियों का कारण बन सकती है। आजकल की व्यस्त जीवनशैली, काम के अत्यधिक दबाव और देर रात तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने की आदत के कारण लोग नींद को नजरअंदाज कर रहे हैं। यह आदत न केवल दिनभर की थकान और सुस्ती का कारण बनती है, बल्कि धीरे-धीरे हृदय प्रणाली को भी भारी नुकसान पहुंचाती है।
सीडीसी की रिपोर्ट के अनुसार, जब इंसान सोता है तो शरीर विश्राम की स्थिति में होता है, जिससे ब्लड प्रेशर का स्तर प्राकृतिक रूप से कम हो जाता है। लगातार नींद पूरी न होने से शरीर तनाव में रहता है और ब्लड प्रेशर सामान्य से ऊपर बना रहता है। दीर्घकालिक आधार पर नींद की यह कमी टाइप 2 डायबिटीज, मोटापा और धमनियों में रुकावट जैसी समस्याओं का जोखिम कई गुना बढ़ा देती है। अध्ययनों से स्पष्ट हुआ है कि वयस्कों को प्रतिदिन कम से कम 7 घंटे की निर्बाध नींद अवश्य लेनी चाहिए, ताकि दिल का कार्यतंत्र सही तरीके से संचालित होता रहे।
नींद संबंधी बिमारियों का बढ़ा खतरा
ऐतिहासिक रूप से स्वास्थ्य विशेषज्ञ आहार और कसरत को ही प्राथमिक मानते रहे हैं, लेकिन बीते कुछ वर्षों में नींद संबंधी विकारों के आंकड़े चिंताजनक रूप से बढ़े हैं। स्वास्थ्य डेटा के मुताबिक, जो लोग नियमित रूप से 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें दिल का दौरा पड़ने और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा उन लोगों की तुलना में अधिक पाया गया है जो 7 से 8 घंटे की संतुलित नींद लेते हैं।
क्या कहते है एक्सपर्ट्स?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि नींद केवल शरीर को आराम देने का जरिया नहीं है, बल्कि यह दिल को खुद की मरम्मत करने का अवसर प्रदान करती है। सीडीसी के स्वास्थ्य शोधकर्ताओं का स्पष्ट मत है कि सही खानपान और शारीरिक गतिविधि के साथ पर्याप्त नींद को स्वास्थ्य का तीसरा मुख्य स्तंभ माना जाना चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करना चाहिए, ताकि शरीर का प्राकृतिक जैविक चक्र सही ढंग से कार्य कर सके।
कैसे बरते सावधानियां ?
नींद के प्रति बढ़ती जागरूकता से लोगों की दिनचर्या में सकारात्मक सुधार आने की संभावना है। अगर लोग डिजिटल गैजेट्स का सीमित इस्तेमाल कर नींद का सही शेड्यूल अपनाते हैं, तो हृदय रोगों से होने वाले इलाज के बढ़ते खर्च और असमय स्वास्थ्य समस्याओं में कमी आएगी। कार्यस्थलों पर भी कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और हृदय संबंधी बीमारियों से होने वाली मौतों के आंकड़ों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. दिल को सेहतमंद रखने के लिए रोजाना कितने घंटे की नींद जरूरी है?
उत्तर: वयस्कों को दिल की बेहतर सेहत और शरीर की सही रिकवरी के लिए हर दिन कम से कम 7 घंटे की नींद लेनी चाहिए।
Q. नींद की कमी से दिल पर क्या बुरा असर पड़ता है?
उत्तर: कम नींद लेने से हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
Q. सोने से कितनी देर पहले स्क्रीन (मोबाइल/टीवी) से दूरी बनानी चाहिए?
उत्तर: अच्छी और गहरी नींद के लिए सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।
Q. क्या रात को हल्का भोजन करने से नींद बेहतर आती है?
उत्तर: हां, रात में भारी खाना पचाने में समय लेता है, इसलिए हल्का भोजन करने से पाचन सही रहता है और नींद अच्छी आती है।
Q. लगातार अनिद्रा की समस्या होने पर क्या करना चाहिए?
उत्तर: यदि लंबे समय से नींद न आने या बार-बार नींद टूटने की परेशानी है, तो बिना देर किए डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।


