Van Dhan Yojana: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही प्रशिक्षण, शासकीय सहयोग और बाजार की सुविधा मिले, तो महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर नई पहचान हासिल कर सकती हैं। जशपुर जिले के वन धन विकास केंद्र सहकारी समिति, पनचक्की की अध्यक्ष श्रीमती कांता बाई इस सकारात्मक बदलाव की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरी हैं।
वन धन योजना से मिला नया अवसर
प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना के तहत संचालित इस केंद्र ने मुख्य रूप से उरांव जनजाति की महिलाओं को रोजगार और सम्मान दोनों दिए हैं। पहले ये महिलाएं केवल जंगल से वनोपज संग्रह कर साधारण जीवन जीती थीं और कम आय पर निर्भर थीं, लेकिन अब वे वनोपज से मूल्य संवर्धित (Value-added) उत्पाद तैयार कर बेहतरीन आय अर्जित कर रही हैं।
प्रशिक्षण और तकनीक ने बढ़ाया आत्मविश्वास
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ और ट्राइफेड (TRIFED) के सहयोग से महिलाओं को आधुनिक तकनीक, उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और विपणन (मार्केटिंग) का गहन प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही प्रसंस्करण के लिए आवश्यक मशीनें और अन्य तकनीकी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा।
च्यवनप्राश सहित कई हर्बल उत्पाद तैयार
प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाओं ने स्थानीय औषधीय वनोपज से शुद्ध च्यवनप्राश सहित कई हर्बल उत्पाद तैयार करना शुरू किया। इन उत्पादों को राज्य के प्रसिद्ध ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत बाजार में उतारा गया, जिससे इन्हें बाजार में हाथों-हाथ लिया गया और अच्छी पहचान मिली।
1.91 करोड़ रुपये का हुआ कारोबार
मार्च 2026 तक वन धन विकास केंद्र, पनचक्की ने लगभग 1.91 करोड़ रुपये का कुल कारोबार कर एक मिसाल कायम की है। इससे समिति से जुड़ी महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
महिलाओं को मिली नई सामाजिक पहचान
आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ-साथ इन महिलाओं का सामाजिक आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वे अपने गांव और समाज में सम्मान के साथ पहचानी जाती हैं। श्रीमती कांता बाई के कुशल नेतृत्व में यह केंद्र क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है। वन धन विकास योजना ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।
महिलाओं की उपलब्धि
जशपुर जिले के पनचक्की वन धन विकास केंद्र सहकारी समिति की अध्यक्ष श्रीमती कांता बाई हैं, जिनके नेतृत्व में महिलाओं ने यह उपलब्धि हासिल की है।
महिलाओं को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ और ट्राइफेड (TRIFED) के सहयोग से आधुनिक तकनीक, उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और विपणन का प्रशिक्षण मिला।
महिलाओं द्वारा तैयार च्यवनप्राश और अन्य हर्बल उत्पाद ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत बाजार में बेचे जाते हैं।
पनचक्की वन धन विकास केंद्र ने मार्च 2026 तक लगभग 1.91 करोड़ रुपये का कारोबार किया है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और जनजातीय समुदायों (विशेषकर महिलाओं) को स्थानीय वनोपजों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के जरिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना है।


