Person late at night scrolling short videos on smartphone in dark room
रात के अंधेरे में स्मार्टफोन पर रील्स स्क्रॉल करता युवा, नई रिसर्च में इसे बताया गया सेहत के लिए नुकसानदायक।

Health Tips: सोशल मीडिया के दौर में रील्स और शॉर्ट वीडियो देखना लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। हाल ही में जारी हुई एक नई वैश्विक स्टडी में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि लगातार कई घंटों तक रील्स देखना और रात में स्क्रीन स्क्रॉल करना गंभीर लत का रूप ले रहा है। चीन की त्सिंगहुआ यूनिवर्सिटी और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि 13 से 24 वर्ष के युवा इस आदत की चपेट में सबसे तेजी से आ रहे हैं। इस शोध ने डिजिटल स्वास्थ्य और मानसिक तंदुरुस्ती को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है।

वर्ष 2025 में ‘कांत स्टॉप स्क्रॉलिंग’ शीर्षक से प्रकाशित इस विस्तृत रिपोर्ट में 10,111 यूजर्स के ऑनलाइन व्यवहार, सर्वे और इंटरव्यू का गहन विश्लेषण किया गया। शोध के आंकड़ों के मुताबिक, केवल बार-बार एप्लिकेशन खोलना लत की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि लगातार घंटों तक एक ही जगह बैठकर वीडियो देखना और विशेष रूप से रात के समय नींद खराब करके स्क्रॉल करना इस समस्या का मुख्य लक्षण है। अध्ययन में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि जो लोग इस लत से ज्यादा प्रभावित हैं, उनका वीडियो देखने का दायरा बहुत सीमित हो जाता है और वे बार-बार एक ही श्रेणी सामग्री में उलझे रहते हैं।

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डिजिटल दौर में बढ़ती निर्भरता
अतीत पर नजर डालें तो पिछले कुछ वर्षों में इंटरनेट डेटा के सस्ते होने और कम अवधि वाले वीडियो प्रारूपों के आने के बाद स्क्रीन टाइम में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शुरुआती दौर में मनोरंजन का साधन समझे जाने वाले ये प्लेटफॉर्म अब लोगों की दैनिक दिनचर्या और एकाग्रता को प्रभावित कर रहे हैं। चिकित्सा जगत लंबे समय से बच्चों और किशोरों में स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग को लेकर चेतावनी देता रहा है। इस नए अध्ययन ने पुराने दावों को वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ सही ठहराते हुए स्पष्ट किया है कि देर रात तक स्क्रीन देखने की प्रवृत्ति मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय
मामले की गंभीरता पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बदलती डिजिटल सामग्री दिमाग में तात्कालिक आनंद की भावना पैदा करती है, जिससे व्यक्ति समय का अनुमान नहीं लगा पाता। मनोचिकित्सकों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति अपनी नींद और जरूरी काम छोड़कर स्क्रीन पर समय बिताने लगे, तो इसे केवल मनोरंजन न मानकर व्यवहारिक बदलाव के रूप में देखना चाहिए। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस समस्या से निपटने के लिए उपयोगकर्ताओं को खुद अपने स्क्रीन समय पर निगरानी रखनी होगी, अन्यथा भविष्य में इसके गंभीर मानसिक और शारीरिक दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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पढ़ाई पर पड़ता नकारात्मक प्रभाव
इस लगातार बढ़ती प्रवृत्ति का सीधा असर युवाओं की पढ़ाई, कार्यकुशलता और नींद के चक्र पर पड़ रहा है। देर रात तक जगने के कारण लोगों में तनाव, चिड़चिड़ापन और आंखों में सूखापन जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि छात्रों की एकाग्रता क्षमता में कमी आ रही है, जिससे उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर असर पड़ा है। यदि समय रहते इस व्यवहार पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले समय में समाज के बड़े हिस्से को डिजिटल डिटॉक्स और काउंसलिंग की जरूरत पड़ सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: शॉर्ट वीडियो की लत का सबसे बड़ा लक्षण क्या माना गया है?
उत्तर: देर रात तक लगातार कई घंटों तक स्क्रीन स्क्रॉल करना और नींद खराब करके वीडियो देखना इसका मुख्य लक्षण है।

Q2: किस उम्र के लोग रील्स और शॉर्ट्स की लत से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
उत्तर: अध्ययन के अनुसार, 13 से 24 वर्ष के युवा और विशेष रूप से 18 से 24 वर्ष के लोग इससे अधिक प्रभावित पाए गए हैं।

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Q3: क्या बार-बार ऐप खोलना भी लत की निशानी है?
उत्तर: नहीं, रिसर्च के मुताबिक सिर्फ ऐप खोलना लत का पक्का संकेत नहीं है, बल्कि लगातार बिना रुके देखना ज्यादा चिंताजनक है।

Q4: शॉर्ट वीडियो देखने की आदत को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?
उत्तर: स्क्रीन टाइम लिमिट तय करके, सोने से पहले फोन दूर रखकर और खाली समय में मैदानी खेल या किताबें पढ़ने जैसे विकल्प अपनाकर इसे रोका जा सकता है।

Q5: क्या लगातार स्क्रॉलिंग से मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है?
उत्तर: हां, देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद का चक्र प्रभावित होता है, जिससे तनाव, ध्यान न लगना और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।

नवीन कुमार साहू को पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में 5 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से Bachelor of Science (Electronic Media) और Master of Science (Electronic Media) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने राजधानी रायपुर के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें छत्तीसगढ़, राष्ट्रीय समाचार, राजनीति, शिक्षा, सरकारी योजनाओं, कारोबार, तकनीक और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन का अनुभव है। वे तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार एवं लेख तैयार करने में विशेषज्ञता रखते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक और उपयोगी जानकारी सरल भाषा में पहुंचाना है।