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Bilaspur: तबादले के दो अलग–अलग मामलों में अफसरों को हाईकोर्ट से मिली राहत, शासन के बनाए नियमों का मिला फायदा

Bilaspur: तबादले के दो अलग–अलग मामलों में अफसरों को हाईकोर्ट से मिली राहत, शासन के बनाए नियमों का मिला फायदा
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

 Transfer challenged in High Court: राज्य शासन के वन तथा महिला बाल विकास विभाग के दो अफसरों का तबादला आदेश पिछले दिनों जारी किया गया था। इससे असंतुष्ट दोनों अफसरों ने हाई कोर्ट की शरण ली, जहां से दोनों को राहत मिल गई है।

हाई कोर्ट में दायर इन मामलों में पहला मनेन्द्रगढ़ का है, जहां पदस्थ रेंज अफसर को हटाकर जिला यूनियन में पदस्थ किया गया था, वहीं दूसरे मामले में महिला बाल विकास विभाग, सक्ती के जिला कार्यक्रम अधिकारी के तबादले पर रोक लगा दी गई है।

सहमति के बिना तबादले को दी चुनौती

 वन विभाग के अधिकारी मानवेंद्र मार्कंडे ने 2 सितंबर 2026 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें मनेंद्रगढ़ वन मंडल के केल्हारी रेंज में एसडीओ (वन) के पद से हटाकर जिला यूनियन, मनेंद्रगढ़ में लघु वनोपज सहकारी संघ का उप प्रबंध संचालक बनाया गया था।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की अदालत में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि इस प्रकार की पदस्थापना कर्मचारी की सहमति के बिना नहीं की जा सकती। इसके जवाब में प्रतिवादी की ओर से बताया गया कि शासन ने 12 सितंबर 2025 को स्थायी वित्तीय निर्देश जारी किए थे, जिनके तहत कर्मचारी की सहमति के बिना भी ऐसी पदस्थापना की जा सकती है।

अफसर की दलील पर जताई सहमति

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता की ओर से उठाया गया कानूनी मुद्दा विचारणीय है। हालांकि अदालत ने इस स्तर पर मामले पर अंतिम राय नहीं दी है। कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने फिलहाल 2 सितंबर 2026 के तबादला आदेश के प्रभाव पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर 2026 को होगी।  

पदस्थापना के दो साल पूरे होने से पहले तबादला

बिलासपुर हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की ही अदालत में एक अन्य मामले में सुनवाई हुई। इसमें कोर्ट ने सक्ती के महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुधाकर बोडले के तबादले पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की सक्ती में पदस्थापना को अभी दो वर्ष पूरे नहीं हुए थे, जबकि राज्य की तबादला नीति में सामान्यतः दो वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले स्थानांतरण नहीं किए जाने का प्रावधान है।

प्रशिक्षण संस्थान में किया गया था तबादला

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमन तंबोली ने बताया कि सुधाकर बोडले को 7 नवंबर 2025 को पदोन्नति के बाद सक्ती में जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद पर पदस्थ किया गया था। इसके बाद 1 सितंबर 2026 को उनका तबादला सक्ती से सरगुजा स्थित क्षेत्रीय महिला प्रशिक्षण संस्थान में उप संचालक के पद पर कर दिया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पदस्थापना की निर्धारित दो वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले ही तबादला आदेश जारी कर दिया गया। मामले पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने भी इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में अंतरिम राहत देना उचित समझते हुए 1 सितंबर 2026 के तबादला आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इसका परिणाम यह होगा कि फिलहाल सुधाकर बोडले का सक्ती से सरगुजा तबादला प्रभावी नहीं होगा।

कोर्ट का अहम फैसला

हाईकोर्ट के इस आदेश से तबादला नीति में निर्धारित कार्यकाल और उसके पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक पहलू सामने आया है। मामले की आगे की सुनवाई में तबादले से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल 

Q1. किन अफसरों को राहत मिली?

 वन विभाग के मानवेंद्र मार्कंडे (केल्हारी रेंज) और WCD के DPO सुधाकर बोडले (सक्ती)।

Q2. तबादला क्या था?

 मार्कंडे को जिला यूनियन लघु वनोपज संघ में, बोडले को सक्ती से सरगुजा प्रशिक्षण संस्थान में उप संचालक।

Q3. कोर्ट ने क्यों रोका?

 एक में सहमति बिना पदस्थापना का कानूनी मुद्दा विचारणीय, दूसरे में दो साल की तबादला नीति से पहले तबादला।

Q4. शासन का तर्क क्या था?

 12 सितंबर 2025 के स्थायी वित्तीय निर्देश से सहमति बिना पदस्थापना संभव।

Q5. अगली सुनवाई कब?

 मार्कंडे मामले में 15 अक्टूबर 2026, बोडले मामले में अगली सुनवाई तक स्टे।

Shami Imam
लेखक / पत्रकार:

Shami Imam

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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