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SIR Controversy: ‘चुनाव आयोग के स्वयंभू प्रवक्ता मत बनें विजय शर्मा’, कांग्रेस का डिप्टी सीएम पर बड़ा हमला

SIR Controversy: छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर 24 लाख 99 हजार 823 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इस पूरी प्रक्रिया को छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक घोटाला करार दिया […]

Chhattisgarh Congress Communication Department Chairman Sushil Anand Shukla
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य

SIR Controversy: छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर 24 लाख 99 हजार 823 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इस पूरी प्रक्रिया को छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक घोटाला करार दिया है।

कांग्रेस का आरोप है कि संभावित हार से घबराई भाजपा सरकार चुनाव आयोग के तंत्र का दुरुपयोग कर गरीबों और आदिवासियों के मताधिकार को छीनने का षड्यंत्र रच रही है।

डिप्टी सीएम विजय शर्मा पर कांग्रेस का तीखा हमला

कांग्रेस ने उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। सुशील आनंद शुक्ला ने दो टूक शब्दों में कहा कि विजय शर्मा चुनाव आयोग के ‘स्वयंभू प्रवक्ता’ न बनें। उन्होंने आरोप लगाया कि डिप्टी सीएम इस तरह के बयानों के जरिए निर्वाचन आयोग और भाजपा के गुप्त षड्यंत्रों पर पर्देदारी करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे जनता और कांग्रेस पार्टी कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

बिना भौतिक सत्यापन के फिल्टर लगाकर काटे गए वोट

प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्य में 19 लाख 13 हजार 540 मतदाताओं को ‘अनुपस्थित’ और ‘शिफ्टेड’ बता दिया गया, जबकि 6 लाख से अधिक लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। बिना किसी घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किए, सिर्फ कंप्यूटर एल्गोरिदम और फिल्टर का इस्तेमाल करके गरीबों, मजदूरों और आदिवासियों के नाम सूची से हटाए गए हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह कोई प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि एक सुनियोजित अपराध है।

फॉर्म-7 के मनमाने इस्तेमाल और बिलासपुर का उदाहरण

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि सत्ता के दबाव में फॉर्म-7 (नाम हटाने का आवेदन) का जमकर दुरुपयोग किया जा रहा है। इसका प्रमाण देते हुए बताया गया कि बिलासपुर शहर के तीन बूथों में एक साथ 117 मतदाताओं के नाम काट दिए गए थे, लेकिन जब कांग्रेस ने आपत्ति जताई और भौतिक सत्यापन कराया तो वे सभी मतदाता सही पाए गए। इसी प्रकार रायपुर, बिरगांव, बालोद, दुर्ग और बस्तर से भी जबरिया नाम काटे जाने की हजारों शिकायतें सामने आ रही हैं।

वोट की डकैती और गरीबों के अधिकारों पर हमला

कांग्रेस ने कड़े शब्दों में कहा कि भाजपा अपनी राजनीतिक जमीन खो चुकी है, इसलिए वह सीधे चुनाव मैदान में मुकाबला करने के बजाय ‘वोटर लिस्ट’ के साथ खेलकर चुनाव जीतना चाहती है। यह चुनाव आयोग के कंधों पर बंदूक रखकर की गई वोट की डकैती है। इससे खासकर वे युवा, ग्रामीण, गरीब और मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं जो अपनी आजीविका के सिलसिले में अस्थायी रूप से बाहर निवास करते हैं।

नोटिस और पारदर्शिता को लेकर खड़े किए गंभीर सवाल

पार्टी ने सरकार से तीखे सवाल पूछते हुए कहा है कि यदि यह एक रूटीन और सामान्य प्रक्रिया थी, तो नाम काटने से पहले संबंधित मतदाता को लिखित नोटिस क्यों नहीं दिया गया? अब जब सरकार कह रही है कि 2003 की मतदाता सूची में नाम होना अनिवार्य नहीं है, तो फिर इसी आधार पर पहले लोगों के नाम क्यों काटे गए? कांग्रेस ने खुली चुनौती देते हुए कहा कि क्या भाजपा सरकार में इतनी हिम्मत है कि वह इन 25 लाख लोगों की सूची सार्वजनिक करे और बूथवार इसकी जांच कराए।

कांग्रेस की मांग: बीएलओ करें मौका मुआयना और पंचनामा

इस पूरे विवाद के बीच प्रदेश कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट मांग की है कि निर्वाचन कार्यों में लगे बीएलओ (BLO) को उन सभी 25 लाख मतदाताओं के पते पर जाकर मौका मुआयना करना चाहिए। इसके बाद विधिवत पंचनामा तैयार किया जाए और स्थानीय निकाय की सामान्य सभा में पूर्ण अनुमोदन व सत्यापन के बाद ही किसी भी प्रकार के विलोपन की कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

Shravan Sharma
लेखक / पत्रकार:

Shravan Sharma

विशेष संवाददाता (Special Correspondent)

वरिष्ठ न्यूज़ रिपोर्टर, The Rural Press

The Rural Press के लिए निष्पक्ष और निर्भीक रिपोर्टिंग।

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