बुधवार, 4 नवंबर 2026 बुध, 4 नवं |
संस्करण:
अंतरराष्ट्रीय

No Kings Protest 2026: ईरान से जंग के बीच अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग, तानाशाह नहीं चलेगा के नारों से गूंजा व्हाइट हाउस

No Kings Protest 2026: ईरान से जंग के बीच अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग, तानाशाह नहीं चलेगा के नारों से गूंजा व्हाइट हाउस
तस्वीर: The Rural Press फाइल / सौजन्य
TRP अलर्ट्स

ताज़ा समाचार तुरंत पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें

No Kings Protest 2026: दुनिया एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी भीषण जंग की तपिश महसूस कर रही है, तो दूसरी तरफ खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के घर यानी अमेरिका में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। नो किंग्स (No Kings) मुहिम के तहत लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। दरअसल, प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि उन्हें लोकतंत्र चाहिए, तानाशाही नहीं।

सड़कों पर उतरा जनसैलाब, पुलिस अलर्ट

ग्राउंड सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, न्यूयॉर्क सिटी, वाशिंगटन डीसी और लॉस एंजिल्स जैसे बड़े शहरों में पैर रखने की जगह नहीं बची है। बड़ी रैलियों में शामिल लोग सीधे तौर पर ट्रंप की नीतियों को चुनौती दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राष्ट्रपति खुद को राजा समझने लगे हैं और जनता की आवाज दबाई जा रही है। गौरतलब है कि मिनेसोटा में फेडरल एजेंट्स की कार्रवाई के दौरान दो नागरिकों की मौत ने इस आग में घी डालने का काम किया है।

युद्ध और महंगाई से त्रस्त जनता

बता दें कि इस विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह ईरान के साथ जारी युद्ध है, जिसे शुरू हुए अब एक महीना बीत चुका है। सूत्रों ने बताया कि युद्ध की वजह से अमेरिका में महंगाई सातवें आसमान पर है और इमिग्रेशन पर की गई सख्ती से आम लोग भड़के हुए हैं। रैलियों में शामिल एक्टिविस्ट्स का कहना है कि असली ताकत जनता के हाथ में होती है, किसी एक शासक के पास नहीं।

सात समंदर पार भी गूंजी आवाज

दिलचस्प बात यह है कि यह गुस्सा सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। पेरिस, लंदन और लिस्बन जैसे यूरोपीय शहरों में भी ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ लोग सड़कों पर दिखे। प्रशासन ने इन रैलियों को वामपंथी मानसिकता से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है, लेकिन सड़कों पर दिख रही भीड़ कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

पिछले रिकॉर्ड टूटने का दावा

आयोजकों की मानें तो इस बार का प्रदर्शन पिछले साल के रिकॉर्ड तोड़ सकता है। बता दें कि पिछले साल जून में 50 लाख और अक्टूबर में करीब 70 लाख लोग जुटे थे। हालांकि, व्हाइट हाउस ने तंज कसते हुए इन रैलियों को ट्रंप डिरेंजमेंट थेरेपी सेशन करार दिया है। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।

इस विरोध प्रदर्शन का सीधा असर वैश्विक बाजार और अमेरिकी राजनीति पर पड़ रहा है। अगर यह प्रदर्शन लंबा खिंचता है, तो ईरान युद्ध के मोर्चे पर ट्रंप प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़ सकते हैं। साथ ही, महंगाई और आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर सरकार को जनता के सामने जवाब देना भारी पड़ेगा।

पढ़ें ये खबरें

Rverma
लेखक / पत्रकार:

Rverma

विशेष संवाददाता

The Rural Press के लिए निष्पक्ष, निर्भीक और जनसरोकार से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्टिंग।

The Rural Press सम्पादकीय दल सभी खबरें देखें →
विज्ञापन