Gudhal Plant Care: नवरात्रि का पावन अवसर करीब है। इस दौरान पूजा-पाठ के लिए गुड़हल के फूलों की मांग बढ़ जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुड़हल का फूल मां भगवती को बेहद प्रिय माना जाता है।
ऐसे में अगर आपके घर में गुड़हल का पौधा लगा है, लेकिन उसमें फूल नहीं आ रहे हैं, तो गार्डनिंग एक्सपर्ट के बताए कुछ जरूरी उपायों को अपनाकर उसमें दोबारा फूल लाए जा सकते हैं। पौधे में फूल न आने का मुख्य कारण सही मात्रा में धूप, पानी और पोषण न मिलना होता है।
धूप की कमी से भी रुक सकते हैं फूल
गुड़हल के पौधे की अच्छी ग्रोथ और फूलों के लिए पर्याप्त सीधी धूप जरूरी है। पौधे को रोजाना करीब 5-6 घंटे धूप मिलने से फूल आने में मदद मिलती है। अगर पौधे को घर के अंदर या ऐसी जगह रखा गया है, जहां पर्याप्त रोशनी नहीं पहुंचती, तो उसकी ग्रोथ प्रभावित हो सकती है। इसलिए गुड़हल के पौधे को ऐसी जगह रखें, जहां उसे अच्छी धूप और हवा मिल सके।
ज्यादा नाइट्रोजन से पत्ते बढ़ सकते हैं
गुड़हल में फूल न आने की एक वजह जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन वाली खाद भी हो सकती है। इससे पौधे में पत्तियों और शाखाओं की वृद्धि अच्छी होती है, लेकिन फूल कम आ सकते हैं। पौधे को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा की जरूरत होती है। इसके लिए 7:6:5 अनुपात वाला एनपीके उर्वरक इस्तेमाल किया जा सकता है। खाद देने के बाद हल्का पानी दें और पौधे को पर्याप्त धूप में रखें।
पानी देते समय इन बातों का रखें ध्यान
गुड़हल की मिट्टी में हल्की नमी जरूरी है, लेकिन लगातार पानी जमा रहने से जड़ें खराब हो सकती हैं। इससे फूल आना भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए गमले में अच्छी जल निकासी की व्यवस्था रखें। मिट्टी सूखने लगे तभी जरूरत के अनुसार पानी दें।
समय-समय पर करें हल्की प्रूनिंग
समय-समय पर गुड़हल की हल्की छंटाई यानी प्रूनिंग करने से नई शाखाएं निकलने में मदद मिलती है। नई शाखाओं पर फूल आने की संभावना अधिक रहती है। इसके अलावा पौधे की सूखी, कमजोर और खराब शाखाओं को भी हटा देना चाहिए।
जैविक खाद और कीटों पर भी दें ध्यान
पौधे की अच्छी ग्रोथ के लिए 10-15 दिन के अंतराल पर जैविक खाद या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं, अगर पौधे में एफिड्स या दूसरे कीट दिखाई दें, तो नीम तेल का उचित मात्रा में घोल बनाकर स्प्रे किया जा सकता है।
गुड़हल में फूल लाने के लिए पौधे को पर्याप्त धूप, संतुलित पोषण और नियंत्रित पानी देना जरूरी है। इसके साथ गमले में अच्छी जल निकासी और समय-समय पर हल्की छंटाई का भी ध्यान रखें।



